नहर फूटने की सूचना मिलते ही किसान रात में ही अपने खेतों की ओर दौड़े, लेकिन तब तक नहर का पानी खेतों में भर चुका था और पूरी फसल जलमग्न हो गई थी। ग्रामीणों ने शुक्रवार को नरवर तहसीलदार कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई।
किसान बोले- जीविका का कोई दूसरा साधन नहीं किसानों का कहना है कि उनके पास जीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है और उनकी सालभर की मेहनत इसी फसल पर निर्भर थी। उन्होंने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है, ताकि वे अगली फसल की बुवाई कर सकें।
इस घटना की जानकारी मिलने पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संजय हर्षाना भी किसानों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने जल संसाधन विभाग के एसडीओ रविंद्र शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए। हर्षाना ने कहा कि नहर का बार-बार फूटना महज संयोग नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत है।
संजय हर्षाना ने आरोप लगाया कि एसडीओ द्वारा नहर को जानबूझकर फुड़वाया जाता है, ताकि मरम्मत के नाम पर बिल लगाकर सरकारी धन निकाला जा सके। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने भी इन आरोपों की पुष्टि की है और एसडीओ के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
तहसीलदार बोले- मुआवजा दिलाया जाएगा मामले की जानकारी मिलते ही नरवर तहसीलदार ओमप्रकाश तिवारी ने तत्काल पटवारियों की टीम को मौके पर भेजकर स्थिति का मुआयना करने के निर्देश दिए। तहसीलदार ने किसानों को आश्वासन दिया कि फसलों का सर्वे कराया जाएगा और जो भी नुकसान होगा, उसका उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।
वहीं, दूसरी ओर जब एसडीओ रविंद्र शर्मा से इस मामले में संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।