सड़क जाम करने वाली 'हत्यारिन' बाघिन MT-6 फिर कैमरे में कैद:सांख्य सागर झील से वायरल हुआ वीडियो, खेतों में काम कर रहे किसानों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले में एक बार फिर माधव टाइगर रिजर्व की सबसे चर्चित और खतरनाक मानी जाने वाली मादा बाघिन MT-6 सुर्खियों में है। झांसी-शिवपुरी लिंक रोड पर कुछ दिन पहले सड़क के बीच बैठकर करीब 20 मिनट तक यातायात रोक देने वाली यही बाघिन अब सांख्य सागर झील के पास वायरल वीडियो में दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। खेतों में खरीफ की बुवाई कर रहे किसान अब हर झाड़ी और हर आहट से सहमे हुए हैं।

कुछ दिन पहले सड़क पर बैठी इस बाघिन के कारण झांसी-शिवपुरी लिंक रोड पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। बाइक सवार वापस लौटने लगे थे और लोग अपनी गाड़ियों के शीशे बंद कर अंदर ही बैठे रहे। वन विभाग की टीम के पहुंचने के बाद ही बाघिन जंगल की ओर गई और यातायात सामान्य हो सका। अब सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने उस घटना की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

जंगल छोड़कर बार-बार आबादी की ओर क्यों आ रही MT-6?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर माधव टाइगर रिजर्व की यह बाघिन बार-बार जंगल की सीमा छोड़कर सड़क और गांवों के आसपास क्यों पहुंच रही है? वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि शिकार की तलाश, क्षेत्रीय संघर्ष या अन्य प्राकृतिक कारण इसकी वजह हो सकते हैं, लेकिन लगातार आबादी के करीब पहुंचना चिंता का विषय है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि खेतों पर जाना भी डरावना लगने लगा है। सुबह चार बजे से लेकर देर रात तक किसान खेती के काम में लगे रहते हैं। ऐसे में किसी भी समय आमना-सामना होने का खतरा बना हुआ है।

1 जनवरी से शुरू हुआ था खौफ का सिलसिला

MT-6 पहली बार चर्चा में तब आई थी जब 1 जनवरी को उसने सतनवाड़ा क्षेत्र में एक वृद्ध पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके बाद सुरवाया थाना क्षेत्र के कई गांवों में मवेशियों का शिकार होने की घटनाएं सामने आईं। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध और खतरे को देखते हुए 13 जनवरी 2026 को वन विभाग ने उसका रेस्क्यू कर बाड़े में रखा था।

लेकिन कुछ समय बाद उसे दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया और अब एक बार फिर उसके आबादी के करीब आने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

घर से 50 मीटर दूर भैंस का किया शिकार

बीते 16 अप्रैल को रायपुर धमकन गांव में सुबह करीब छह बजे MT-6 ने किसान रामबरन गुर्जर के घर से महज 50 मीटर दूर बंधी भैंस पर हमला कर दिया। बाघिन भैंस को घसीटकर जंगल की ओर ले गई। उसी समय किसान घर से बाहर निकले और उनका सामना बाघिन से हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि रामबरन किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। कुछ सेकंड की देरी जानलेवा साबित हो सकती थी।

ग्रामीण की मौत के बाद भी नहीं थमी हलचल

MT-6 वही बाघिन है जिस पर 24 अप्रैल 2026 को नरवर-सतनवाड़ा मार्ग स्थित ऐरावन गांव के निवासी सरवन आदिवासी की मौत से जुड़ी घटना में आरोप लगाए गए थे। उस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया था। ग्रामीण लंबे समय से इस बाघिन की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सांख्य सागर झील के पास फिर दिखी, वीडियो हुआ वायरल

गुरुवार शाम कुछ युवाओं ने सांख्य सागर झील के पास सड़क किनारे घनी झाड़ियों में बैठी एक बाघिन का वीडियो अपने मोबाइल से रिकॉर्ड किया। शनिवार को यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वन विभाग के जानकारों का मानना है कि वीडियो में दिखाई देने वाली बाघिन MT-6 हो सकती है, क्योंकि उसकी लोकेशन अक्सर मझेरा और सांख्य सागर क्षेत्र के आसपास दर्ज होती रही है। हालांकि, विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

ट्रैकिंग सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

लगातार सामने आ रही घटनाओं ने वन विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, रिजर्व के कई बाघों के रेडियो कॉलर या तो खराब हैं या सभी बाघों पर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनकी सटीक लोकेशन का पता समय पर नहीं चल पाता। पहले से ही लापता मादा बाघिन MT-1 का पता नहीं चल पाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब MT-6 का बार-बार सड़क और आबादी तक पहुंचना मॉनिटरिंग सिस्टम की प्रभावशीलता पर नई बहस छेड़ रहा है।

खेती के मौसम में सबसे बड़ा खतरा

इस समय खरीफ की बुवाई अपने चरम पर है। मोहम्मदपुर, मझेरा, खुटैला, रायपुर धमकन, सतनवाड़ा और आसपास के कई गांवों के किसान सुबह अंधेरे से लेकर देर रात तक खेतों में काम कर रहे हैं। कई किसान खेतों पर ही रुकते हैं। ऐसे में यदि बाघिन की गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए, अलर्ट जारी किया जाए और यदि खतरा बना रहे तो आवश्यकतानुसार बाघिन को दोबारा रेस्क्यू करने पर विचार किया जाए।

ग्रामीणों के लिए सावधानी

वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह है कि:
सुबह और शाम अकेले जंगल या खेत की ओर न जाएं।
बच्चों और मवेशियों को बिना निगरानी के बाहर न छोड़ें।
बाघ दिखाई देने पर उसके पास जाने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें।

तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
नोट: इस खबर में "हत्यारिन" शब्द स्थानीय चर्चाओं और पूर्व घटनाओं के संदर्भ में प्रयुक्त है। किसी भी घटना की अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही मानी जाएगी।
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