प्रतिबंधित भूमि के अवैध सौदों पर प्रशासन सख्त, कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जारी किए कड़े निर्देश

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में प्रतिबंधित एवं नियंत्रित श्रेणी की भूमि के अवैध हस्तांतरण, पंजीयन और नामांतरण पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने मंगलवार को आयोजित बैठक में जिला पंजीयक, उप पंजीयकों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना सक्षम अनुमति के किसी भी प्रतिबंधित भूमि का पंजीयन या नामांतरण नहीं किया जाए।

प्रशासन के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं जिनमें अहस्तांतरणीय भूमि, पट्टे की भूमि, शासन प्रदत्त भूमि और भूदान भूमि जैसी प्रतिबंधित श्रेणी की जमीनों का नियमों की अनदेखी कर हस्तांतरण किया गया। कलेक्टर ने कहा कि इससे शासन के स्वामित्व और हितों को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। इसलिए अब हर प्रकरण में वैधानिक अनुमति और दस्तावेजों की गहन जांच अनिवार्य होगी।

नामांतरण से पहले होगी सख्त जांच

तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी नामांतरण प्रकरण में भूमि की प्रकृति, खसरा अभिलेख, सक्षम अधिकारी की अनुमति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच किए बिना आदेश पारित न किए जाएं। केवल दस्तावेज प्रस्तुत कर देने भर से नामांतरण नहीं होगा, बल्कि हस्तांतरण की वैधता भी सुनिश्चित की जाएगी।

पांच साल के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे

जिला प्रशासन ने पिछले पांच वर्षों में प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि से जुड़े सभी नामांतरण मामलों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। जिन प्रकरणों में सक्षम अनुमति उपलब्ध नहीं मिलेगी, उनकी अलग से जांच कर प्रतिवेदन उपखंड अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने साफ कर दिया है कि भविष्य में यदि किसी प्रतिबंधित भूमि का अवैध पंजीयन या नामांतरण पाया जाता है तो संबंधित उप पंजीयक, तहसीलदार या नायब तहसीलदार की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई, प्रतिकूल प्रविष्टि और दायित्व निर्धारण जैसी कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।

इस सख्ती के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि पिछले वर्षों में हुए विवादित भूमि हस्तांतरणों की जांच में कितने मामले सामने आएंगे और क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? जिला प्रशासन की इस पहल को शासन की भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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