शिवपुरी के कोलारस में 200 साल पुराना कुआं अचानक धंसाराम मंदिर परिसर के पास देर रात 3 से 4 बजे के बीच हुआ हादसा:कुएं की पत्थरों से बनी दीवार भी भरभराकर गिरी

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर शिवपुरी:शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कस्बे में राम मंदिर के बाहरी परिसर के पास करीब 200 साल पुराना कुआं अचानक धंस गया। बताया जा रहा है कि घटना देर रात करीब 3 से 4 बजे के बीच हुई। कुएं के अचानक धंसने के साथ ही उसके अंदर बनी वर्षों पुरानी पत्थरों की दीवार भी भरभराकर कुएं के भीतर जा गिरी। रात के सन्नाटे में हुए इस हादसे के समय मौके पर कोई मौजूद नहीं था, जिसके चलते जनहानि नहीं हुई।

सुबह जब लोगों को कुएं के धंसने की जानकारी मिली तो मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुराना कुआं अचानक जमीन में समा जाने की घटना ने आसपास रहने वाले लोगों को हैरान कर दिया। लोग मौके पर पहुंचकर धंसे हुए कुएं और उसके आसपास फैले मलबे को देखते रहे। स्थानीय लोगों के बीच दिनभर इसी घटना की चर्चा होती रही।

रात के अंधेरे में धंस गया सदियों पुराना कुआं

जानकारी के अनुसार, राम मंदिर परिसर के बाहरी हिस्से में यह कुआं लंबे समय से मौजूद था। स्थानीय लोगों के मुताबिक इसकी उम्र करीब 200 वर्ष बताई जा रही है। कुएं के निर्माण में पुराने समय की पत्थर की चिनाई का इस्तेमाल किया गया था। इसके अंदर पत्थरों से बनी मजबूत दीवारनुमा संरचना भी थी।

सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात अचानक कुएं की संरचना कमजोर हुई और वह धंसने लगा। देखते ही देखते कुएं के अंदर बनी पत्थरों की दीवार भी ढह गई। भारी मात्रा में पत्थर और मलबा कुएं के अंदर जा गिरा। घटना के बाद कुएं की पुरानी संरचना का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

हादसा इतनी रात में हुआ कि आसपास मौजूद लोगों को भी इसकी भनक तत्काल नहीं लग सकी। सुबह लोगों ने जब मौके की स्थिति देखी तो उन्हें घटना की जानकारी हुई।

दिन में होता हादसा तो हो सकता था बड़ा नुकसान
इस घटना में सबसे बड़ी राहत यह रही कि कुआं रात के उस समय धंसा, जब आसपास लोगों की आवाजाही बेहद कम थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के समय राम मंदिर परिसर के आसपास श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यदि कुआं दिन के समय अचानक धंसता और आसपास लोग मौजूद होते, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

लोगों का कहना है कि पुराने कुएं की स्थिति पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो शायद इस तरह की घटना से बचाव के उपाय किए जा सकते थे। हालांकि फिलहाल घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है।

पत्थरों की पुरानी दीवार भी मलबे में तब्दील

कुएं के धंसने के साथ ही उसके भीतर मौजूद पत्थरों की पुरानी दीवार भी ढह गई। बताया जा रहा है कि यह दीवार कुएं की ऐतिहासिक संरचना का हिस्सा थी। वर्षों पुरानी पत्थर की बनावट अचानक टूटने से कुएं के अंदर मलबा भर गया।

स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पुराना कुआं नहीं था, बल्कि क्षेत्र की पुरानी संरचनाओं में शामिल एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। अचानक हुए इस हादसे ने पुराने निर्माणों की सुरक्षा और उनकी स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह मौके पर जुटी भीड़, हर कोई रह गया हैरान

सुबह जैसे ही कुएं के धंसने की खबर आसपास के लोगों को मिली, लोग मौके पर पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई यह देखकर हैरान था कि जिस पुराने कुएं को लोग लंबे समय से वहां देखते आ रहे थे, वह अचानक धंस चुका था।

लोगों ने कुएं के आसपास की स्थिति देखी और पुराने पत्थरों के मलबे को देखकर घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया। कुछ लोगों ने इसे रात में हुई घटना बताते हुए राहत जताई कि उस समय कोई व्यक्ति कुएं के आसपास मौजूद नहीं था।

प्रशासन के लिए भी चुनौती, सुरक्षा जरूरी

पुराने कुएं के धंसने के बाद अब सबसे जरूरी सवाल इसकी सुरक्षा को लेकर है। आसपास लोगों की आवाजाही को देखते हुए धंसे हुए हिस्से के आसपास सुरक्षा व्यवस्था किया जाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि कोई व्यक्ति या बच्चा गलती से मलबे या खुले हिस्से के पास न पहुंच जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में मौजूद पुराने कुओं, बावड़ियों और अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। कई पुराने निर्माण वर्षों से बिना रखरखाव के खड़े हैं और उनकी कमजोर होती संरचना कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।

बाल-बाल बचा बड़ा हादसा

कोलारस में 200 साल पुराने कुएं के अचानक धंसने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर और कस्बों में मौजूद पुराने जलस्रोतों और ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है।

फिलहाल इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। रात के सन्नाटे में कुआं धंसने से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन अगर यही घटना दिन में होती और कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही होती, तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।

अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर धंसे हुए कुएं के आसपास सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करे और यह भी जांचे कि कहीं आसपास की जमीन या अन्य पुरानी संरचनाएं भी कमजोर तो नहीं हैं। फिलहाल कोलारस में 200 साल पुराने कुएं के अचानक धंसने की घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
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