दंगल बना दंगल: कुश्ती से शुरू हुआ विवाद लाठी-डंडों तक पहुंचा, चौकी में भी भिड़े लोग… 15 पर केस

Nikk Pandit
0

सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के नरवर थाना क्षेत्र के मगरौनी कस्बे में रविवार शाम दंगल (कुश्ती) का आयोजन उस वक्त हिंसक झड़प में बदल गया, जब मामूली विवाद ने दो पक्षों के बीच लाठी-डंडों की मारपीट का रूप ले लिया। बीसीसी ग्राउंड में मेले के दौरान हुई इस घटना के बाद हालात इतने बिगड़े कि पुलिस चौकी तक में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

बताया जा रहा है कि शाम करीब 6 बजे कुश्ती को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया, जिसमें कई लोग घायल हुए। घायलों को नरवर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जबकि एक गंभीर घायल को शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा।

चौकी में भी नहीं थमा विवाद

हैरानी की बात यह रही कि मारपीट के बाद जब दोनों पक्ष शिकायत दर्ज कराने मगरौनी पुलिस चौकी पहुंचे, तो वहां भी विवाद शांत नहीं हुआ। चौकी परिसर में ही दोनों पक्षों के बीच फिर से झड़प हो गई। स्थिति बिगड़ती देख चौकी प्रभारी अभिमन्यु सिंह और पुलिस टीम ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और माहौल को नियंत्रित किया।

दोनों पक्षों की शिकायत पर 15 पर क्रॉस केस
पहले पक्ष की ओर से राजकुमार गुर्जर ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से दीपक उर्फ दीपू गुर्जर ने शिकायत दी। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में कुल 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

अब उठ रहे बड़े सवाल

आखिर मेले और दंगल जैसे सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे?

मामूली विवाद इतना बड़ा कैसे हो गया कि लाठी-डंडे चलने लगे?

पुलिस चौकी में ही दोबारा झड़प होना क्या कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाता?

क्या ऐसे आयोजनों के लिए प्रशासन पहले से कोई ठोस योजना बनाता है या सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है?

प्रशासन और शासन पर भी सवाल

यह घटना सिर्फ एक झड़प नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की तैयारियों और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जहां एक ओर मेले और दंगल जैसे आयोजनों में भारी भीड़ जुटती है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी नजर आते हैं।

चौकी परिसर में ही दोबारा मारपीट होना यह दर्शाता है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हालात काबू में नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित रह गया है?

जरूरत इस बात की है कि शासन और प्रशासन ऐसे आयोजनों के लिए पहले से मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और त्वरित हस्तक्षेप की रणनीति तैयार करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। वरना “दंगल” जैसे सांस्कृतिक आयोजनों का रूप इसी तरह “हिंसा” में बदलता रहेगा।
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)