सागर शर्मा शिवपुरी:खबर कोलारस नगर परिषद की लापरवाही ने एक बार फिर स्वच्छ भारत मिशन की सच्चाई को उजागर कर दिया है। न्यायालय के पास लाल कोठी जाने वाले मार्ग पर स्थित सार्वजनिक शौचालय के पास बनी नाली पूरी तरह से चौक पड़ी है, लेकिन हालात सुधारने की बजाय नगर परिषद के कर्मचारियों ने शौचालय का पाइप सीधे उसी बंद नाली में डाल दिया। नतीजा—नाली उफान पर, गंदगी सड़कों पर और आम जनता बदबू व बीमारियों के बीच जीने को मजबूर।
यह सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है। सरकार स्वच्छता के नाम पर बड़े-बड़े दावे करती है, योजनाओं के लिए करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इतनी बदहाल क्यों है? क्या यही है “स्वच्छ भारत मिशन” की असली तस्वीर? क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजों में सफाई दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं?
❓ जब नाली पहले से बंद थी तो उसमें और गंदगी डालने की अनुमति किसने दी?
❓ क्या नगर परिषद के इंजीनियरों और अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था या सब कुछ बिना जांच के किया गया?
❓ जनता के टैक्स के पैसे का उपयोग आखिर किस तरह हो रहा है—सफाई के लिए या गंदगी बढ़ाने के लिए?
❓ अगर यही हाल रहा तो क्या सरकार इन हालात की जिम्मेदारी लेगी?
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। लोग पूछ रहे हैं—क्या आम जनता सिर्फ टैक्स देने के लिए है और बदले में गंदगी झेलने के लिए?
⚠️ अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं
किया गया, तो यह सिर्फ एक नाली की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि स्वास्थ्य संकट बनकर सामने आ सकती है। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कब जागती है या फिर ऐसे ही योजनाओं की पोल खुलती रहेगी।