जैविक खेती से बदली किस्मत: आदिराम रावत बने किसानों के लिए मिसाल, दो एकड़ में कर रहे प्राकृतिक खेती

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर परंपरागत कृषि विकास योजना किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। शिवपुरी विकासखंड के ग्राम करसेना निवासी किसान आदिराम रावत इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपनी खेती की दिशा बदल चुके हैं, बल्कि अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

आदिराम रावत पिछले दो वर्षों से परंपरागत कृषि विकास योजना से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जैविक खेती में पहले से रुचि थी, लेकिन योजना के माध्यम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक जानकारी ने उन्हें पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में वे अपनी दो एकड़ कृषि भूमि पर पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं।

किसान आदिराम रावत खेती में जीवामृत, घनजीवामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक आदानों का स्वयं निर्माण कर उपयोग करते हैं। इसके साथ ही देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार जैविक खाद का उपयोग कर भूमि की उर्वरता बनाए रख रहे हैं। इससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार आया है।

आदिराम रावत केवल स्वयं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ भी साझा कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन से क्षेत्र के कई किसान अब प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। इससे किसानों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की जागरूकता भी बढ़ी है।

उनका कहना है कि जैविक खेती से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है और भूमि की उत्पादकता भी बेहतर बनी हुई है। वे मानते हैं कि प्राकृतिक खेती भविष्य की जरूरत है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य की भी रक्षा करती है।

आदिराम रावत ने किसानों से अपील की है कि वे परंपरागत कृषि विकास योजना का लाभ उठाएं और अधिक से अधिक संख्या में प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान बनने की दिशा में आगे बढ़ें।
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