शिवपुरी में अब तक सिर्फ 176 मिमी बारिश: पिछले साल के मुकाबले 559 मिमी कम वर्षा, किसानों की बढ़ी चिंता

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा ECG:खबर शिवपुरी जिले में मानसून की रफ्तार अभी भी उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। जुलाई का तीसरा सप्ताह बीतने के बाद भी जिले में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। भू-अभिलेख विभाग के अनुसार 1 जून 2026 से 20 जुलाई 2026 तक शिवपुरी जिले में औसतन केवल 176.08 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 735.12 मिमी वर्षा की तुलना में करीब 559 मिमी कम है। बारिश में आई इस बड़ी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी बढ़वार अब पूरी तरह आगामी बारिश पर निर्भर हो गई है।

जिले की सामान्य औसत वार्षिक वर्षा 816.3 मिमी मानी जाती है, जबकि पिछले वर्ष पूरे मानसून सीजन में जिले में 1585.86 मिमी रिकॉर्ड वर्षा हुई थी। इस बार अब तक हुई बारिश सामान्य के मुकाबले काफी कम है, जिससे कृषि विशेषज्ञों के साथ-साथ किसान भी मौसम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

इन तहसीलों में हुई सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश

भू-अभिलेख विभाग के अनुसार अब तक शिवपुरी तहसील में सबसे अधिक 258.40 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद नरवर में 235 मिमी, कोलारस में 208 मिमी, करैरा में 190 मिमी, पिछोर में 181 मिमी, खनियाधाना में 162.50 मिमी, बदरवास में 152.80 मिमी, पोहरी में 121 मिमी तथा बैराड़ में सबसे कम 76 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

बारिश का यह असमान वितरण किसानों के लिए नई परेशानी बनता जा रहा है। कई क्षेत्रों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।

किसानों की बढ़ी चिंता

जिले के अधिकांश किसान सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग, तिल और धान जैसी खरीफ फसलों की खेती करते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। जिन किसानों ने शुरुआती बारिश के भरोसे बुवाई कर दी थी, वे अब खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने को लेकर चिंतित हैं।

कई गांवों में किसान लगातार आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि यदि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

जल स्रोतों पर भी असर

कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि तालाबों, छोटे जलाशयों और नदियों में भी पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाया है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई छोटे तालाब अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं भर पाए हैं।

मौसम पर टिकी उम्मीदें

कृषि और मौसम से जुड़े जानकारों का मानना है कि अभी मानसून का महत्वपूर्ण समय बाकी है। यदि आने वाले दिनों में लगातार अच्छी बारिश होती है तो फसलों को काफी हद तक राहत मिल सकती है। वहीं किसान भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त में मानसून पूरी रफ्तार पकड़ेगा।

जिले में अब तक दर्ज वर्षा (मिमी में)

शिवपुरी – 258.40 मिमी
नरवर – 235.00 मिमी
कोलारस – 208.00 मिमी
करैरा – 190.00 मिमी
पिछोर – 181.00 मिमी
खनियाधाना – 162.50 मिमी
बदरवास – 152.80 मिमी
पोहरी – 121.00 मिमी
बैराड़ – 76.00 मिमी

फिलहाल पूरे जिले के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द अच्छी बारिश होती है तो खरीफ फसलों को नई जिंदगी मिल सकती है, लेकिन बारिश का इंतजार लंबा खिंचने पर खेती के साथ-साथ जल संसाधनों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
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