बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के पिछोर अनुभाग के खोड़ गांव में मंगलवार को एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। वर्षों पुराने रास्ते को बहाल कराने की मांग को लेकर पाल समाज के लोग अपनी सैकड़ों भेड़ों के साथ गौरा टीला–पिछोर मार्ग पर उतर आए और चक्काजाम कर दिया। सड़क पर भेड़ों का झुंड खड़ा होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों की समझाइश और कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और यातायात दोबारा शुरू कराया गया।
जानकारी के अनुसार विवाद खोड़ टपरियन क्षेत्र में तालाब तक जाने वाले पारंपरिक रास्ते को लेकर है। पाल समाज के लोगों का कहना है कि वर्षों से वे इसी मार्ग से अपनी भेड़ों को तालाब तक पानी पिलाने ले जाते रहे हैं। उनका आरोप है कि हाल के दिनों में इस रास्ते पर अतिक्रमण कर मकान का निर्माण किया जा रहा है, जिससे उनका आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि संबंधित भूमि शासकीय है और तालाब तक पहुंचने वाला रास्ता सार्वजनिक उपयोग का है। उनका आरोप है कि जाटव समुदाय के कुछ लोगों द्वारा रास्ते को बंद करने की कोशिश की जा रही है, जिससे पशुपालकों के सामने रोजमर्रा की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सैकड़ों भेड़ों को पानी पिलाना और चरागाह तक ले जाना मुश्किल हो जाएगा।
अपनी मांग को लेकर पाल समाज के लोगों ने सैकड़ों भेड़ों को सड़क पर खड़ा कर दिया। देखते ही देखते गौरा टीला–पिछोर मार्ग पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। बसें, कारें, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन काफी देर तक जाम में फंसे रहे। राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर भेड़ों की बड़ी संख्या होने के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
चक्काजाम की सूचना मिलते ही खोड़ चौकी प्रभारी कुसुम गोयल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। उनके साथ वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली और दोनों पक्षों को शांत रहने की समझाइश दी। काफी देर तक चली चर्चा के दौरान प्रशासन ने विवाद की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विजय पाल, अंकेश पाल और महेंद्र पाल ने कहा कि उनकी एकमात्र मांग तालाब तक जाने वाले पारंपरिक रास्ते को बहाल कराना है। उनका कहना था कि यदि रास्ता जल्द नहीं खोला गया तो पाल समाज बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा और जरूरत पड़ने पर फिर से चक्काजाम किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने की मांग की।
करीब एक घंटे तक चली बातचीत के बाद प्रशासन के आश्वासन पर प्रदर्शनकारी मान गए और उन्होंने अपनी भेड़ों को सड़क से हटा लिया। इसके बाद गौरा टीला–पिछोर मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका। जाम खुलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली और वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई।
प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि शासकीय भूमि या सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने का भी प्रयास किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
यह अनोखा प्रदर्शन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। सड़क पर सैकड़ों भेड़ों के साथ किया गया चक्काजाम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बना, वहीं इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रास्तों और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े विवादों को भी एक बार फिर सामने ला दिया। अब सभी की निगाहें प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।