सालों से सड़क किनारे कर रहे अंतिम संस्कार
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे अंतिम संस्कार करना उनकी परंपरा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मजबूरी है। उनका कहना है कि मजरे में आज तक मुक्तिधाम नहीं बन पाया, जिसके कारण हर मृत्यु पर इसी स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
ग्रामीण ब्रजेश जाटव ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से सरपंच रामकृष्ण यादव से मुक्तिधाम बनवाने की मांग की जा रही है, लेकिन सिर्फ आश्वासन देकर बात टाल दी जाती है। "सरपंच हर बार कहता है कि इस बार बनवा दूंगा, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ," ब्रजेश ने कहा। वहीं सरपंच रामकृष्ण यादव का कहना है कि शासन की योजना में मजरा-टोले में अलग से मुक्तिधाम बनाने का प्रावधान नहीं है। इसी कारण पंचायत के चार मजरों के लोग पुराने निर्धारित स्थानों पर ही अंतिम संस्कार करते हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य गांव टुड़यावद और केलधार में मुक्तिधाम निर्माण किया जा चुका है।
ग्रामीणों ने की मुक्तीधाम की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और पंचायत की उदासीनता के कारण उन्हें वर्षों से असुविधा झेलनी पड़ रही है। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि वायरल वीडियो के बाद जिम्मेदार अधिकारी समस्या का समाधान निकालेंगे और मजरे में एक व्यवस्थित मुक्तिधाम बनवाया जाएगा।