ग्रामीणों में आक्रोश:शिवपुरी में हैंडपंप का दूषित पानी पीने से युवक बीमारः जांच टीम 'पानी पीने योग्य नहीं' का नोटिस चिपकाकर लौटी

Nikk Pandit
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   ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था।

सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भटनावार के मठ गांव में हैंडपंप का दूषित पानी पीने से एक युवक की तबीयत बिगड़ गई, जिसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सूचना मिलने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय हैंडपंप पर केवल "पानी पीने योग्य नहीं है" का नोटिस चिपकाकर लौट गई। विभाग के इस रवैये से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था। इसी का पानी पीने से रोहित पुरी गोस्वामी बीमार हुए थे। अब हैंडपंप के उपयोग पर रोक लगने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को सिर्फ चेतावनी देने के बजाय शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

रोहित पुरी गोस्वामी।

सरपंच बोले- शिकायत के बाद भी नहीं सुधारे हैंडपंप दुलारा पंचायत के सरपंच दिनेश धाकड़ ने विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पंचायत में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने से पानी निकल सकता है, लेकिन इस संबंध में दी गई कई लिखित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

अफसर बोले- एसडीओ को भेजकर जांच कराएंगे
मामले में PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम गुप्ता ने कहा कि दुलारा पंचायत और मठ गांव में जांच के लिए एसडीओ को भेजा जाएगा। जांच के बाद पेयजल समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।

देखिए गांव के दूषित पानी वाले हैंडपंप की तस्वीरें...प्रतिबंध के बाद भी दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

मठ गांव में मंगलवार को पीएचई विभाग द्वारा हैंडपंप पर सूचना चस्पा कर दी गई कि इसका पानी पीने योग्य नहीं है। इसके बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में उसी दूषित पानी को छानकर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी का कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है, ऐसे में रोक के बाद भी उन्हें इसी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।ग्रामीण बोले- नहीं मिल रहा बीमारी से आराम

रोहित पुरी गोस्वामी ने बताया कि गांव में केवल एक ही हैंडपंप है, जिससे मैला पानी निकलता है। इसी पानी को पीने से पेट दर्द, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां फैल रही हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं कल ही अस्पताल से छुट्टी लेकर लौटे हैं और बीमारी के इलाज में अब तक 25 से 30 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। उनके अनुसार गांव के करीब 25 से 30 लोग दूषित पानी पीने से बीमार हो चुके हैं।

आकाश पुरी गोस्वामी ने बताया कि हैंडपंप का पानी पीने से ग्रामीण जुकाम, खांसी और पेट की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। डॉक्टरों द्वारा पेट की बीमारी बताई जा रही है। हालात यह हैं कि हर रोज गांव से कोई न कोई व्यक्ति बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि हैंडपंप के पानी से बदबू आ रही है, लेकिन कोई विकल्प न होने के कारण ग्रामीण वही पानी पीने को मजबूर हैं।

ग्रामीण महिला आशा ने बताया कि दूषित पानी पीने से उनकी तबीयत 15 से 20 दिनों से खराब है। इलाज कराने के बाद भी जब उन्हें फिर से वही पानी पीना पड़ता है, तो स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण सिरनाम पुरी ने बताया कि हैंडपंप का पानी पीने से उन्हें पेट की गंभीर बीमारी हो गई है।

वे तीन से चार बार अस्पताल में भर्ती होकर लौट चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई आराम नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग और पंचायत की ओर से पानी की कोई ऑप्शनल व्यवस्था नहीं की गई है।
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