चार दिन पहले लाई गई थी; शिवपुरी में गुस्साए ग्रामीणों ने ट्रैकिंग टीम को घेरा:माधव टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन का हमला

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के माधव टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे डोंगर गांव में मादा बाघिन के हमले के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। बुजुर्ग ग्रामीण पर हुए हमले के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची टाइगर ट्रैकिंग टीम को घेर लिया और पार्क प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि जिस मादा बाघिन ने हमला किया है, उसे महज चार दिन पहले 27 दिसंबर को ही रिजर्व में छोड़ा गया था।

डोंगर गांव निवासी शिवलाल बघेल (65) आज (गुरुवार) सुबह करीब 7 बजे अपने घर से लगभग 100 मीटर दूर खेत में शौच के लिए गए थे। तभी खेत में झाड़ियों के बीच छिपी बैठी मादा बाघिन ने उन पर अचानक हमला कर दिया। हमले के दौरान शिवलाल बघेल की तेज चीख निकल गई।

संयोगवश उसी समय गांव के कुछ ग्रामीण पास में एकजुट होकर अलाव ताप रहे थे। आवाज सुनते ही ग्रामीण लाठियां लेकर खेत की ओर दौड़े और शोरगुल कर बाघिन को खदेड़ दिया। ग्रामीणों की तत्परता से बुजुर्ग की जान बच सकी। ग्रामीणों के मुताबिक टाइगर कुछ कुत्तों के बच्चों को भी अपना निवाला बनाया है।

27 दिसंबर को माधव टाइगर रिजर्व में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाई गई मादा बाघ को छोड़ा गया था।

घायल बुजुर्ग जिला अस्पताल में भर्ती

घटना के बाद तत्काल रेंज ऑफिस को सूचना दी गई। वन विभाग के वाहन से घायल शिवलाल बघेल को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। परिजन फतेह सिंह बघेल ने बताया कि शिवलाल के शरीर पर कई जगह गंभीर जख्म आए हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत स्थिर है। घटना की खबर फैलते ही गांव में आक्रोश फैल गया।

जैसे ही माधव टाइगर रिजर्व की ट्रैकिंग टीम और पार्क प्रबंधन के अधिकारी गांव पहुंचे, ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों का आरोप है कि टाइगर की निगरानी में भारी लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से बाघिन गांव तक पहुंच गई और हमला कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते निगरानी और अलर्ट सिस्टम मजबूत होता, तो यह घटना टाली जा सकती थी।

पहले भी दिख चुकी थी टाइगर की मूवमेंट

ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से गांव और खेतों के आसपास टाइगर की मूवमेंट देखी जा रही थी। इसकी शिकायतें भी वन विभाग को दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। डर के चलते ग्रामीण अब हमेशा समूह में ही रहते हैं और किसी को भी अकेले बाहर निकलने नहीं दिया जाता।

शिवलाल बघेल को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

27 दिसंबर को ही लाई गई थी नई मादा बाघ

उल्लेखनीय है कि 27 दिसंबर को शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाई गई करीब तीन साल की मादा बाघ को नेशनल पार्क की मध्य रेंज में छोड़ा गया था। इसके साथ ही रिजर्व में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 8 हो गई थी।

प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में रिजर्व में 4 मादा बाघ, 2 नर बाघ और 2 शावक मौजूद हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हमलावर बाघिन वही नई मादा है, जिसे हाल ही में छोड़ा गया था।

कई गांवों में दहशत, मुआवजे का मुद्दा फिर उठा ग्रामीणों ने बताया कि माधव टाइगर रिजर्व घोषित होने से पहले कई गांव खाली कराए गए थे, लेकिन कुछ गांवों को आज तक पूरा मुआवजा नहीं मिला। मजबूरी में लोग आज भी रिजर्व की सीमा से सटे गांवों में रह रहे हैं। डोंगर गांव भी इन्हीं में से एक है। टाइगर की बढ़ती गतिविधियों के चलते ग्रामीण दहशत के साए में जीवन जी रहे हैं।

घटना के बाद माधव टाइगर रिजर्व की टीम ने इलाके में सुरक्षा घेरा बनाकर बाघिन की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। वन विभाग का कहना है कि बाघिन को जंगल की ओर वापस भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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