सागर शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत एक बार फिर उजागर हो गई, जब एक गर्भवती महिला को समय पर उचित इलाज नहीं मिला और उसे मजबूरन चलती बस में ही बच्ची को जन्म देना पड़ा। यह घटना जिले की चिकित्सा व्यवस्था और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के अनुसार, करैरा क्षेत्र के ग्राम बघेदरी निवासी 26 वर्षीय आशा पत्नी रविंद्र वंशकार सोमवार दोपहर अपने परिजनों के साथ गांव लौट रही थीं। अमोला के पास सिरसौद चौराहे पर अचानक प्रसव पीड़ा तेज हो गई और बस के अंदर ही महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे दिया।
डिलीवरी के बाद परिजनों ने प्रसूता को तुरंत बस से उतारकर टमटम के जरिए सिरसौद अस्पताल पहुंचाया, जहां मां और नवजात को भर्ती कर लिया गया। फिलहाल दोनों सुरक्षित हैं।
⚠️ अस्पताल पर लापरवाही के आरोप:
परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रसूता की सास कौशल्या के अनुसार, वे 5 दिन पहले ही डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां प्रसव पीड़ा होने के बावजूद दवाइयों और इंजेक्शन के जरिए दर्द को टालते रहे।
आरोप है कि डॉक्टर बार-बार ऑपरेशन की बात कह रहे थे, जबकि महिला के पहले दो बच्चे सामान्य प्रसव से हुए थे। अस्पताल में देखभाल और रुकने की व्यवस्था को लेकर भी परिवार परेशान था।
इन सब कारणों से तंग आकर परिजन बिना सूचना दिए प्रसूता को लेकर गांव लौट रहे थे, और इसी दौरान रास्ते में बस में ही डिलीवरी हो गई।
🗣️ प्रशासन का पक्ष:
करैरा बीएमओ डॉ. नारायण सिंह कुशवाह का कहना है कि परिजन बिना बताए अस्पताल से चले गए थे, इसलिए अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं बनती। फिलहाल प्रसूता और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।
❗ उठते बड़े सवाल:
क्या जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल रहा?
बार-बार ऑपरेशन के दबाव के पीछे क्या कारण हैं?
क्या स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लाचार हो चुकी है कि बस में डिलीवरी हो?
🔥 निष्कर्ष (तीखा वार):
👉 जब अस्पताल भरोसा तोड़ दें, तो सड़क ही सहारा बनती है… शिवपुरी की यह घटना सिस्टम पर बड़ा सवाल है—जवाब अब प्रशासन को देना होगा!