खतौरा अनाज मंडी में किसानों का फूटा गुस्सा! तुलाई में देरी से हंगामा, व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील स्थित खतौरा अनाज मंडी सोमवार को उस वक्त हंगामे का केंद्र बन गई, जब समर्थन मूल्य पर उपज बेचने पहुंचे किसानों का सब्र टूट गया। स्लॉट बुक होने के बावजूद घंटों तक तुलाई नहीं होने से किसान भड़क उठे और मंडी परिसर में जोरदार विरोध दर्ज कराया। मौके पर भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता भी पहुंचे और खरीदी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

👉 “स्लॉट है, फिर भी इंतजार क्यों?”

किसानों का आरोप है कि तय समय पर तुलाई नहीं हो रही, जिससे उनकी फसल खुले में पड़ी रही और नुकसान का खतरा बढ़ गया। कई किसानों ने कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग तक कर दी। उनका कहना है कि खरीदी शुरू होने के पहले दिन से ही अव्यवस्था का आलम है, लेकिन जिम्मेदार अब तक सुध लेने नहीं पहुंचे।

⚠️ कर्मचारियों की सफाई—“आईडी लॉक थी”

मामले ने तूल पकड़ा तो उपार्जन केंद्र के कर्मचारियों ने सफाई देते हुए कहा कि खरीदी से जुड़ी आईडी का पासवर्ड रविवार से लॉक हो गया था, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई। यही वजह रही कि किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।

👮 प्रशासन मौके पर, समाधान का दावा

सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार सतीश कुमार उपाध्याय मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और विभाग से संपर्क कर पासवर्ड अनलॉक करवाने का आश्वासन दिया। कुछ ही देर बाद तुलाई प्रक्रिया दोबारा शुरू कराई गई, लेकिन तब तक किसानों में नाराजगी साफ नजर आई।

❓ अब उठते हैं बड़े सवाल

क्या हर बार तकनीकी खराबी के नाम पर किसानों को परेशान किया जाएगा?
जब स्लॉट सिस्टम लागू है, तो समय पर तुलाई क्यों नहीं हो पा रही?
क्या खरीदी केंद्रों पर पहले से तैयारी नहीं की जाती?
और सबसे अहम—किसानों का समय और मेहनत आखिर कब तक यूं ही बर्बाद होती रहेगी?

⚠️ जमीनी सच्चाई बनाम सरकारी दावे

सरकार किसानों को सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में आज भी किसान लाइन में खड़े हैं, इंतजार कर रहे हैं और व्यवस्था से जूझ रहे हैं। खतौरा मंडी की यह घटना एक बार फिर सिस्टम की कमियों को उजागर करती है।

अब देखने वाली बात यह है कि क्या इस घटना के बाद व्यवस्था सुधरेगी या फिर किसान हर सीजन में ऐसे ही हंगामा करने को मजबूर होते रहेंगे।
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