सागर शर्मा शिवपुरी EGC:खबर शिवपुरी जिले की नगर पालिका की सियासत अब खुली बगावत में बदल चुकी है। अंदरखाने सुलग रही नाराजगी अब फट चुकी है और उसकी गूंज सीधे भोपाल तक पहुंच गई है। मंच पर जगह न मिलने की छोटी दिखने वाली घटना ने असल में उस बड़े राजनीतिक तूफान का संकेत दे दिया, जो अब भाजपा संगठन को हिला रहा है।
12 पार्षदों का सीधा अल्टीमेटम—“या वो रहेंगी या हम”
सूत्रों के मुताबिक, शिवपुरी के 12 भाजपा पार्षद भोपाल पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सामने दो टूक संदेश दे आए— 👉 नपाध्यक्ष को हटाइए, वरना हमारी प्राथमिक सदस्यता खत्म समझिए।
यह सिर्फ असंतोष नहीं, बल्कि सीधा-सीधा राजनीतिक विद्रोह है। पार्टी के अंदर से उठी यह आवाज अब संगठनात्मक अनुशासन को चुनौती देती दिख रही है।
सत्ता बनाम संगठन—कौन भारी?
यह मामला अब व्यक्तिगत टकराव से निकलकर सत्ता की लड़ाई बनाम संगठन की साख बन गया है।
अगर 12 पार्षद एक साथ कदम उठाते हैं, तो:
नगर पालिका की सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है
भाजपा की स्थानीय पकड़ कमजोर हो सकती है
विपक्ष को बड़ा मौका मिल सकता है
भोपाल में क्यों फूटा असंतोष?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद अचानक नहीं है। लंबे समय से:
निर्णयों को लेकर असहमति
कार्यशैली पर सवाल
संवादहीनता की शिकायत
अब यह सब मिलकर “विद्रोह” का रूप ले चुका है।
ये 12 पार्षद पहुंचे भोपाल
ओम प्रकाश जैन (वार्ड 5), विजय बिंदास (20), राजा यादव (17), रीना कुलदीप शर्मा (18), रघुराज राजू गुर्जर (21), रितु डिंपल जैन (9), प्रतिभा गोपी शर्मा (10), सरोज धाकड़ (12), नीलम बघेल (11), मीना पंकज शर्मा (31), गौरव बंसल (37), तारा राठौर (28)
❗ अब उठते हैं बड़े और तीखे सवाल
क्या भाजपा के अंदर संगठन कमजोर और गुटबाजी मजबूत हो गई है?
क्या 12 पार्षदों का यह कदम सोची-समझी रणनीति है या भावनात्मक बगावत?
क्या नपाध्यक्ष की कार्यशैली वाकई इतनी विवादित है या यह कुर्सी की राजनीति है?
अगर पार्षद इस्तीफा देते हैं, तो क्या शिवपुरी में सत्ता का खेल पलट जाएगा?
सबसे बड़ा सवाल—क्या भाजपा इस आग को समय रहते बुझा पाएगी या यह और भड़केगी?
शिवपुरी की सियासत में भूचाल!
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि शिवपुरी की राजनीति अब शांत नहीं, उफान पर है।
भोपाल की चुप्पी और फैसला तय करेगा कि यह बगावत यहीं थमेगी… या फिर बड़ा राजनीतिक विस्फोट बनेगी।