जनसुनवाई में मेडिकल कॉलेज विवाद: जांच में आरोप साबित नहीं, फिर भी कार्रवाई नहीं!छात्र ने कलेक्टर से लगाई गुहार—“न्याय नहीं मिला तो अब किससे उम्मीद?”

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी में जनसुनवाई के दौरान राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। छात्र रानु लोधी ने कलेक्टर को आवेदन देकर आरोप लगाया कि 14 नवंबर 2025 को हुई जांच के बाद भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आवेदन पर जनसुनवाई क्रमांक 246 (दिनांक 28/04/2026) दर्ज है, जिससे साफ है कि मामला अब प्रशासन तक पहुंच चुका है।

💥 क्या है पूरा मामला?

रानु लोधी, जो मेडिकल कॉलेज शिवपुरी का छात्र है, ने बताया कि उसके खिलाफ पैथोलॉजी विभाग द्वारा शिकायत की गई थी। इस शिकायत पर कॉलेज प्रबंधन ने एक अनुशासनात्मक समिति का गठन किया और 14 नवंबर 2025 को सुनवाई की गई। छात्र ने समिति के सामने अपने सभी साक्ष्य और पक्ष रखे।

⚖️ जांच में आरोप साबित नहीं हुए

छात्र के अनुसार, समिति की जांच के बाद जारी रिपोर्ट/आदेश में उस पर लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हो पाए। इसके बावजूद आज तक विभाग या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

⚠️ Minutes of Meeting में क्या सामने आया?

दूसरे दस्तावेज (Minutes of Meeting, दिनांक 22/11/2025) के अनुसार—
छात्र के हित में आंतरिक मूल्यांकन सुधारने की बात कही गई
वीडियो/रिकॉर्डिंग में छात्र द्वारा किसी प्रकार की अभद्र भाषा का उपयोग नहीं पाया गया
छात्र केवल अपनी समस्या रखना चाहता था, लेकिन उसे समाधान नहीं मिला
आंतरिक मूल्यांकन के आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए
विभाग को निर्देश दिए गए कि परिणाम पारदर्शी तरीके से नोटिस बोर्ड और व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा किए जाएं

🛑 फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जांच में आरोप सिद्ध नहीं हुए, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या फाइलों में मामला दबा दिया गया या फिर किसी दबाव में कार्रवाई रुकी हुई है?

🤔 छात्र ने क्या मांग की?

रानु लोधी ने कलेक्टर से मांग की है कि—
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
समिति की रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई हो
उसे न्याय दिलाया जाए

📌 अब उठते बड़े सवाल

क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन में जवाबदेही की कमी है?
क्या जांच रिपोर्ट सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई?
क्या छात्र को न्याय मिलेगा या मामला फिर दब जाएगा?
यह मामला अब सिर्फ एक छात्र की शिकायत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल बन चुका है।
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