सागर शर्मा शिवपुरीEGC:खबर शिवपुरी नगर पालिका शिवपुरी इन दिनों सियासी टकराव का अखाड़ा बनी हुई है। अध्यक्ष गायत्री शर्मा और सीएमओ इशांक धाकड़ के बीच विवाद अब खुली जंग में बदल चुका है। जहां एक ओर अध्यक्ष गंभीर आरोप लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर CMO धाकड़ पूरे मामले में नियमों और आंकड़ों के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद, अब प्रशासनिक टकराव में बदला
हाल ही में सामने आए वायरल वीडियो के बाद माहौल और गर्म हो गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच CMO ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ कहा—नगर पालिका का हर काम नियमों के तहत और पारदर्शिता के साथ हो रहा है।
अध्यक्ष के गंभीर आरोप—फाइल घर ले गए सीएमओ!
अध्यक्ष शर्मा ने सीएमओ पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि गांधी पार्क मेले से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइल उनके पास नहीं है, बल्कि सीएमओ उसे अपने घर ले गए हैं और मांगने पर भी उपलब्ध नहीं करा रहे।
साथ ही उन्होंने प्राचीन सिद्धेश्वर मेले को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि शिवरात्रि के बाद अप्रैल में शुरू होने वाले इस मेले के लिए 44 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन इसी बीच गांधी पार्क में 11 लाख रुपए में दूसरा मेला लगवा दिया गया। इससे न सिर्फ राजस्व प्रभावित होगा, बल्कि सिद्धेश्वर मेले के अस्तित्व पर भी संकट आ सकता है।
दो मेले, एक शहर—किसका फायदा?
अध्यक्ष का आरोप है कि एक ही समय में दो मेले लगने से ठेकेदारों की रुचि कम होगी और सदियों पुराना सिद्धेश्वर मेला धीरे-धीरे खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी पार्क मेले की जानकारी उन्हें नहीं दी गई और सिद्धेश्वर मेले की तारीख भी बिना जानकारी अप्रैल से बढ़ाकर मई कर दी गई।
“राजस्व बढ़ाना प्राथमिकता”—CMO का साफ संदेश
सीएमओ इशांक धाकड़ ने गांधी पार्क मेले को लेकर उठे विवाद पर स्पष्ट किया कि यह मेला पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत लगाया गया है और इससे नगर पालिका को 17 लाख रुपए का सीधा फायदा हुआ है।
उन्होंने दो टूक कहा कि जब नगर पालिका को फायदा हो रहा है, तो ऐसे फैसलों पर सवाल उठाना समझ से परे है।
दो मेले, दो फायदे—नुकसान नहीं, मुनाफा!
जहां अध्यक्ष इसे नुकसान बता रही हैं, वहीं CMO का तर्क है कि नियमों के अनुसार एक समय में एक से अधिक मेले आयोजित किए जा सकते हैं, बशर्ते नगर पालिका को राजस्व लाभ हो।
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी पार्क मेला 30 अप्रैल तक समाप्त हो जाएगा और सिद्धेश्वर मेला 1 मई से शुरू होगा—यानि टकराव की कोई स्थिति ही नहीं है।
फाइल गायब? CMO का पलटवार
फाइल घर ले जाने के आरोपों पर CMO ने सीधे तौर पर कोई पुष्टि नहीं की, लेकिन सूत्रों के अनुसार नगर पालिका की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में है और किसी भी प्रकार की अनियमितता की बात निराधार बताई जा रही है।
प्रशासन बनाम राजनीति?
नगर पालिका के अंदरूनी हालात अब यह संकेत दे रहे हैं कि मामला सिर्फ फाइलों या मेलों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निर्णय बनाम राजनीतिक दबाव का है।
CMO धाकड़ का रुख साफ है—काम नियमों से होगा, चाहे किसी को अच्छा लगे या नहीं।
❗ अब सवाल और भी तीखे
क्या राजस्व बढ़ाने वाले फैसलों को भी राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है?
क्या प्रशासनिक निर्णयों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है?
क्या वायरल वीडियो के बाद ध्यान भटकाने के लिए नए आरोप सामने आ रहे हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या नगर पालिका में विकास होगा या विवाद ही चलता रहेगा?
CMO का स्पष्ट संदेश:
“नगर पालिका का हर निर्णय नियमों और शहर के हित में लिया जा रहा है, किसी भी तरह की भ्रांति फैलाना उचित नहीं।”