सागर शर्मा शिवपुरी:खबर सिकंदरा आरटीओ बैरियर पर आधी रात को जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 9 राज्यों की तीर्थ यात्रा कर लौट रही बस को रोककर नकाबपोशों ने 2000 रुपए की एंट्री मांगी… और जब ड्राइवर लाखाराम ने विरोध किया तो उसे बस से खींचकर बेरहमी से पीटा गया। आंख में गंभीर चोट, साथी भी घायल… और आरोप तो यहां तक कि महिलाओं के साथ अभद्रता! क्या यही है सुरक्षा का दावा?
बस में बैठे श्रद्धालु भड़क उठे… ड्राइवर ने बस आड़ी लगाकर हाईवे जाम कर दिया। सोचने वाली बात ये है कि रातभर कोई मदद नहीं पहुंची! आखिर पुलिस और जिम्मेदार अफसर कहाँ थे? सुबह SDOP के आने के बाद ही मामला संभला… तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। क्या आम जनता को इंसाफ के लिए सड़क जाम करना ही आखिरी रास्ता रह गया है?
और सबसे बड़ा आरोप—क्या मामला दबाने के लिए 1 लाख रुपए तक का ऑफर दिया गया? अगर ये सच है तो सवाल और भी खतरनाक हो जाता है… क्या बैरियर पर वसूली सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर तक फैली हुई है? आखिर कौन चला रहा है ये “एंट्री गेम”?
👉 हैरानी की बात ये कि पिछले 8 महीनों में यहां 5 बड़े विवाद हो चुके हैं—फर्जी रसीद, हमला, खूनी संघर्ष, यहां तक कि आत्महत्या की कोशिश! फिर भी कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं? क्या ये सब महज इत्तेफाक है या फिर संगठित खेल?
वहीं दूसरी तरफ चेक पॉइंट प्रभारी सुमन दीक्षित का दावा है कि बस का परमिट नहीं था और चालान से बचने के लिए विवाद किया गया… लेकिन सवाल वही—अगर कागज अधूरे थे, तो कार्रवाई कानून के तहत होती या फिर लाठी-डंडे से? सच क्या है, ये जांच का विषय है…
लेकिन तस्वीर बेहद डरावनी है।
⚖️ अब सवाल सीधे सिस्टम से:
बैरियर पर नकाबपोश कौन थे?
अवैध वसूली किसके संरक्षण में चल रही है?
5 घटनाओं के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
और सबसे बड़ा—क्या आम आदमी सड़क पर भी सुरक्षित नहीं?
📢 शिवपुरी फर्स्ट की अपील: इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो… वरना “बैरियर” नहीं, ये जनता के लिए “खौफ का गेट” बन जाएगा!