बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले की नरवर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सुनारी की महिला सरपंच रामश्री मांझी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम सुनारी निवासी श्रीनिवास रावत ने कलेक्टर शिवपुरी को शिकायत सौंपकर सरपंच के जाति प्रमाण पत्र और चुनावी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरपंच ने कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आदिवासी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुईं।
शिकायतकर्ता श्रीनिवास रावत का आरोप है कि रामश्री मांझी की वास्तविक जाति केवट है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आती है। उनका दावा है कि सरपंच ने अपने पति के नाम में बदलाव कर मांझी जाति दर्शाते हुए जाति प्रमाण पत्र बनवाया और उसी के आधार पर वर्ष 2022 के पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित जाति प्रमाण पत्र 15 जनवरी 2013 को ग्वालियर जिले की राजा की मंडी तहसील से जारी किया गया बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह प्रमाण पत्र निर्धारित नियमों के विपरीत पिता के नाम के बजाय पति के नाम के आधार पर बनाया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
श्रीनिवास रावत ने कलेक्टर से मांग की है कि सरपंच के जाति प्रमाण पत्र, चुनावी अभिलेखों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह मामला सामने आने के बाद पंचायत और क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अभी तक सरपंच रामश्री मांझी की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से भी मामले में जांच संबंधी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की संभावित कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।