बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के सीहोर थाना क्षेत्र के वहगवां गांव के पास मंगलवार को बिजली संकट से परेशान किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। क्षेत्र के करीब 15 गांवों के ग्रामीणों और किसानों ने करेरा–भितरवार मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर पुलिस और बिजली कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा जल्द बिजली व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर मार्ग खोल दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बिजली आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है, क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से खेतों में खड़ी धान की फसल सूखने लगी है। कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली कंपनी द्वारा समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
वहगवां पंचायत के सरपंच गजेंद्र रावत ने बताया कि क्षेत्र के लगभग 15 गांव लगातार बिजली संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंप फीडर पर किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। वहीं आबादी फीडर से भी नियमित बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। बिजली कंपनी लोड सेटिंग और तकनीकी कारणों का हवाला देकर बार-बार बिजली काट देती है, जिससे ग्रामीणों और किसानों दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सरपंच के अनुसार, पंप फीडर पर 24 घंटे में केवल करीब छह घंटे बिजली मिल रही है। वह भी एक साथ नहीं बल्कि बार-बार बाधित होती रहती है। ऐसे में किसान अपने खेतों की सिंचाई समय पर नहीं कर पा रहे हैं। धान की फसल को इस समय लगातार पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बिजली की कमी के कारण मोटर नहीं चल पा रही हैं और फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार बिजली कंपनी के अधिकारियों से मिलकर समस्या बताई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। जब लगातार शिकायतों के बावजूद बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
चक्काजाम के दौरान करेरा–भितरवार मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बसें, ट्रक, कारें और दोपहिया वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे। मौके पर पहुंची पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक बातचीत की।
कुछ देर बाद बिजली कंपनी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि पांच दिन के भीतर बिजली आपूर्ति में सुधार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फीडर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान कर किसानों को बेहतर बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क से हट गए। इसके बाद करीब दो घंटे से बाधित करेरा–भितरवार मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका। जाम खुलने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।
हालांकि ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि पांच दिन के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे फिर से आंदोलन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर दोबारा चक्काजाम भी किया जाएगा। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम चाहिए, क्योंकि बिजली की कमी से किसानों की मेहनत और फसल दोनों बर्बाद हो रही हैं।
क्षेत्र में लगातार बनी बिजली समस्या ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा, जिसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा। अब सभी की निगाहें बिजली कंपनी के उस वादे पर टिकी हैं, जिसमें पांच दिन के भीतर व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया गया है।