बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र से मंगलवार को अचानक लापता हुई चार किशोरियों को पुलिस ने महज कुछ घंटों की तलाश के बाद सकुशल बरामद कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। यह मामला उस समय चर्चा का विषय बन गया जब पता चला कि चारों किशोरियां केवल परिजनों की डांट से नाराज होकर घर से निकल गई थीं। उनके पास मात्र 550 रुपए थे और उसी रकम के सहारे उन्होंने बस और ट्रेन से सफर करते हुए बीना जंक्शन तक का सफर तय कर लिया। राहत की बात यह रही कि समय रहते पुलिस की सक्रियता से चारों सुरक्षित मिल गईं और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने से पहले उन्हें वापस घर पहुंचा दिया गया।
जानकारी के अनुसार, इंदार थाना क्षेत्र की तीन सगी बहनें और उनकी एक सहेली मंगलवार को बिना किसी को बताए घर से निकल गई थीं। जब काफी देर तक चारों का कोई पता नहीं चला तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। उन्होंने आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने इंदार थाने पहुंचकर किशोरियों के लापता होने की सूचना दी।
सूचना मिलते ही इंदार पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने तत्काल चारों किशोरियों की तलाश शुरू की। उनके संभावित मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई गई। साथ ही जिले के अन्य थानों और रेलवे पुलिस को भी सतर्क किया गया ताकि यदि किशोरियां कहीं दिखाई दें तो तुरंत सूचना मिल सके।
पुलिस जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि चारों किशोरियां घर से निकलने के बाद पहले बस के माध्यम से खतौरा पहुंचीं। वहां से वे गुना पहुंचीं और फिर गुना रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर बीना जंक्शन पहुंच गईं। उनके पास कुल 550 रुपए थे, जिनसे उन्होंने पूरे सफर का खर्च उठाया।
इधर, बीना जंक्शन पर चार किशोरियों को अकेले और संदिग्ध परिस्थिति में घूमते देख स्थानीय पुलिस को संदेह हुआ। पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो वे घबरा गईं। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना पता शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र का बताया। इसके बाद बीना पुलिस ने बिना देर किए इंदार थाना पुलिस को पूरी जानकारी दी।
सूचना मिलते ही इंदार पुलिस की टीम परिजनों को साथ लेकर बीना रवाना हुई। वहां पहुंचकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं और चारों किशोरियों को सकुशल अपने साथ वापस शिवपुरी लाया गया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से परिजनों ने राहत की सांस ली और पुलिस का आभार व्यक्त किया।
पुलिस पूछताछ में किशोरियों ने बताया कि वे किसी के बहकावे में नहीं आई थीं और न ही उनका अपहरण हुआ था। उन्होंने बताया कि घर पर किसी बात को लेकर डांट पड़ने से वे नाराज हो गई थीं। गुस्से में उन्होंने घर छोड़ने का फैसला किया और बिना भविष्य के बारे में सोचे निकल पड़ीं। हालांकि बाद में उन्हें अपनी गलती का एहसास भी होने लगा था।
पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें नाबालिग हैं, जिनमें सबसे बड़ी की उम्र करीब 16 वर्ष है। चौथी किशोरी उनकी सहेली है। प्रारंभिक जांच में किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना, अपहरण या मानव तस्करी जैसी आशंका सामने नहीं आई है। सभी किशोरियां पूरी तरह सुरक्षित मिली हैं।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने चारों किशोरियों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने और छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक डांट-फटकार से बचने की सलाह दी। वहीं किशोरियों को भी समझाया गया कि किसी भी परिस्थिति में घर छोड़ना समस्या का समाधान नहीं होता। यदि कोई परेशानी हो तो परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या पुलिस से बातचीत कर उसका हल निकाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था बेहद संवेदनशील दौर होता है। इस उम्र में बच्चों के मन में भावनात्मक उतार-चढ़ाव अधिक होते हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की बात धैर्यपूर्वक सुनें, उन्हें समझें और डांटने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाएं। वहीं बच्चों को भी यह समझना चाहिए कि क्षणिक गुस्से में लिया गया फैसला उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल सकता है।
फिलहाल इस मामले का सुखद अंत हुआ है। पुलिस की तत्परता और बीना पुलिस की सजगता के चलते चारों किशोरियां सुरक्षित अपने परिवार के बीच लौट आई हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात की सीख देती है कि परिवार में संवाद और समझदारी किसी भी समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।