बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक मार्मिक मामला सोमवार को शिवपुरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय में देखने को मिला। फिजिकल थाना क्षेत्र की संजय कॉलोनी निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला विमला बाल्मीक अपने बेटे के कंधों पर बैठकर एसपी कार्यालय पहुंचीं और न्याय की गुहार लगाई। वृद्धावस्था और चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण बड़े बेटे ने उन्हें कंधों पर बैठाकर एसपी कार्यालय तक पहुंचाया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया।
बुजुर्ग महिला ने अपने छोटे बेटे विक्रम बाल्मीक और बहू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ने मारपीट कर उन्हें और उनके पति बालमुकुंद बाल्मीक को घर से बाहर निकाल दिया है। इतना ही नहीं, मकान के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया गया है, जिसके कारण वह पिछले तीन दिनों से बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पीड़िता ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। पारिवारिक विवाद के चलते उन्होंने बड़े बेटे के साथ रहने के लिए अपने मकान में अलग से एक कमरा बनवाया था, ताकि दोनों परिवार अलग-अलग रह सकें और विवाद न हो। लेकिन कुछ समय बाद छोटे बेटे ने मकान के दो अन्य कमरों पर भी कब्जा कर लिया और पूरे घर पर अपना अधिकार जताने लगा।
विमला बाल्मीक का कहना है कि जब उन्होंने और उनके पति ने छोटे बेटे से एक कमरा खाली करने की बात कही, तो उसने और उसकी पत्नी ने उनके साथ अभद्रता की। विरोध करने पर दोनों ने मारपीट की और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद रहने के लिए घर के बाहर एक अस्थायी टपरा डाल दिया गया।
बुजुर्ग दंपति का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के बीच टपरे में रहना बेहद मुश्किल हो गया। पानी टपकने और कीचड़ की वजह से रातें काटना भी कठिन हो गया। आखिरकार मजबूर होकर उन्होंने पुलिस से मदद मांगने का फैसला किया।
पीड़िता के अनुसार, उन्होंने पहले फिजिकल थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस से निराश होने के बाद उन्होंने सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई।
एसपी कार्यालय में दिए गए आवेदन में बुजुर्ग महिला ने अपने मकान की सुपुर्दगी वापस दिलाने, छोटे बेटे और बहू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जीवन के इस अंतिम पड़ाव में उन्हें अपने ही बच्चों से इस तरह का व्यवहार मिलने की कभी उम्मीद नहीं थी।
वृद्ध महिला को बेटे के कंधों पर बैठाकर एसपी कार्यालय पहुंचने का दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों ने इसे समाज के लिए चिंता का विषय बताते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान करना हर संतान का नैतिक और कानूनी दायित्व है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अधिकारियों ने बुजुर्ग महिला का आवेदन प्राप्त कर मामले की जांच कराने और तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा और उनका मकान वापस दिलाया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें जीवन दिया, वही बुजुर्ग आज अपने ही घर में रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न केवल पीड़ितों को राहत देती है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा कानून पूरी मजबूती से करता है।