10-12 घंटे की बिजली कटौती से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: सरपंच सड़क पर लेट गए, 3 घंटे तक रहा चक्काजाम; पुलिस ने संभाली स्थिति

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ रविवार सुबह ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। पिछले कई दिनों से लोड सेटिंग के नाम पर प्रतिदिन 10 से 12 घंटे बिजली आपूर्ति बाधित होने से परेशान ग्रामीणों ने सरपंच अतर सिंह लोधी के नेतृत्व में सिरसौद-पिछोर मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 6 बजे शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन लगभग तीन घंटे तक चला, जिसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को बिना किसी बाधा के निकलने दिया।

प्रदर्शन के दौरान उस समय माहौल और अधिक भावुक हो गया जब सरपंच अतर सिंह लोधी स्वयं सड़क पर लेट गए और ग्रामीणों के साथ बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग पर अड़ गए। ग्रामीणों का कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया, जिसके कारण उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा।

लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना घंटों अंधेरे में रहने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में एक घंटे बिजली दी जाती है और अगले घंटे फिर बिजली काट दी जाती है। इस तरह का सिलसिला दिनभर चलता रहता है, जिससे रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होती है, जब भीषण गर्मी और उमस के बीच लोग बिना बिजली के रात गुजारने को मजबूर हो जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, किसान अपने कृषि कार्य समय पर नहीं कर पा रहे हैं और छोटे व्यापारियों का काम भी प्रभावित हो रहा है। लगातार अंधेरा रहने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले अंधेरे के कारण एक महिला छत से गिरकर घायल हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी विभाग ने व्यवस्था सुधारने की दिशा में गंभीर पहल नहीं की।

15 गांवों के हजारों लोग हो रहे प्रभावित

सरपंच अतर सिंह लोधी ने बताया कि सिरसौद ही नहीं बल्कि आसपास के करीब 15 गांवों के लोग इसी समस्या से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोड सेटिंग के नाम पर लगातार बिजली काटी जा रही है, जबकि सिरसौद से कुछ किलोमीटर दूर करैरा कस्बे में ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलती। इससे ग्रामीणों में भेदभाव की भावना भी पैदा हो रही है।

सरपंच का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। जब लगातार शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

पुलिस ने धैर्य और सूझबूझ से संभाली पूरी स्थिति

चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना किसी तनाव या बल प्रयोग के पूरी स्थिति को शांतिपूर्वक संभाला। थाना प्रभारी ने सबसे पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें शांत रहने की अपील की।

ग्रामीण बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग से तत्काल संपर्क किया और अधिकारियों को मौके पर बुलवाया। पुलिस की सक्रियता और संयमित व्यवहार के कारण प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहा तथा किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।

इस दौरान पुलिस लगातार यातायात व्यवस्था भी संभालती रही। सड़क पर फंसे यात्रियों को समझाइश दी गई और एम्बुलेंस सहित आवश्यक सेवाओं के वाहनों को सुरक्षित तरीके से निकलवाया गया। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस के धैर्यपूर्ण रवैये की सराहना की।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ चक्काजाम

करीब तीन घंटे बाद बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों तथा सरपंच से चर्चा की। अधिकारियों ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने तथा लोड सेटिंग की समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर सड़क से जाम हटाया और यातायात सामान्य हो सका।

हालांकि सरपंच अतर सिंह लोधी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी लोड सेटिंग के नाम पर इसी तरह बिजली कटौती जारी रही तो ग्रामीण फिर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले भी इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन किया गया था, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

ग्रामीणों की मांग है कि शहर और गांव के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए तथा सभी क्षेत्रों को समान रूप से पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाए। वहीं इस पूरे घटनाक्रम में अमोला पुलिस की भूमिका शांतिपूर्ण और जिम्मेदार रही। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित कराया, जिसके चलते मामला बिना किसी विवाद के सुलझ गया।

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