ग्वालियर की स्पेशल SC-ST कोर्ट सख्त; पुलिस से कहा—पता लगाने में जनता की मदद लें, इनाम घोषित करें और नियमानुसार कार्रवाई करें
बंटी शर्मा ECG:खबर ग्वालियर/पिछोर विधानसभा से विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ग्वालियर की विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने दिनेश लोधी के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस को उसकी गिरफ्तारी के लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस को दिनेश लोधी की तलाश तेज करनी होगी। उपलब्ध अदालती जानकारी के अनुसार पुलिस को आरोपी का पता लगाने के लिए आम जनता से सहयोग लेने, नियमानुसार इनाम घोषित करने और गिरफ्तारी के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला ग्वालियर के पुरानी छावनी थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दिनेश लोधी, उम्र करीब 40 वर्ष, निवासी जलालपुर के खिलाफ पुरानी छावनी थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस प्रकरण में अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होने के कारण दिनेश लोधी के खिलाफ पहले भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है।
कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार 28 दिसंबर 2023 को दिनेश लोधी के खिलाफ पहली बार गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। इसके बावजूद वह न तो स्वयं अदालत में उपस्थित हुआ और न ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश कर सकी। लंबे समय तक वारंट की तामील नहीं होने के बाद अब विशेष अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
9 जुलाई को कोर्ट में पेश हुई वारंट तामील की रिपोर्ट
गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को पुरानी छावनी थाने के प्रधान आरक्षक संजय द्विवेदी ने विशेष अदालत के समक्ष अदम तामील वारंट और तस्दीक पंचनामा प्रस्तुत किया। पुलिस की ओर से पेश दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार किया और दिनेश लोधी के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।
अब पुलिस को दिनेश लोधी की तलाश कर उसे गिरफ्तार करते हुए अदालत के समक्ष पेश करना होगा। यदि वह स्वयं न्यायालय के सामने उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना नहीं करता है तो आगे उसके खिलाफ कानून के प्रावधानों के तहत और सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसमें संपत्ति कुर्की से संबंधित वैधानिक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है, हालांकि ऐसी किसी भी कार्रवाई के लिए संबंधित न्यायालय की प्रक्रिया और आदेश आवश्यक होंगे।
सवालों के घेरे में ग्वालियर पुलिस की तलाश
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर खड़ा हो रहा है। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तारी वारंट दिसंबर 2023 में जारी हो चुका था, लेकिन करीब ढाई वर्ष बाद भी दिनेश लोधी को अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका।
वहीं स्थानीय राजनीतिक और सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के बीच दिनेश लोधी की सक्रियता की चर्चाएं लगातार होती रही हैं। वह करैरा और पिछोर क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय बताया जाता रहा है। झांसी और उत्तर प्रदेश में भी उसके संपर्क और आवाजाही की बातें सामने आती रही हैं। विदेश यात्राओं को लेकर भी दावे किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि वारंट जारी था तो पुलिस इतने लंबे समय तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं कर सकी?
क्या पुलिस को दिनेश लोधी की वास्तविक लोकेशन नहीं मिल रही थी? क्या वारंट की तामील के लिए पर्याप्त प्रयास किए गए? यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहा तो पुलिस की नजर उस तक क्यों नहीं पहुंची? विशेष अदालत के ताजा आदेश के बाद ये सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखना पड़ सकता है भारी
स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद दिनेश लोधी के लिए सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहना मुश्किल हो सकता है। पुलिस को वारंट की जानकारी संबंधित इकाइयों तक पहुंचाकर गिरफ्तारी की कार्रवाई करनी होगी। ऐसे में यदि दिनेश लोधी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम, राजनीतिक सभा या अन्य स्थान पर पुलिस की नजर में आता है तो उसे गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया जा सकता है।
अदालत के इस आदेश का सीधा असर उसकी राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति की चुनावी पात्रता या अयोग्यता का अंतिम निर्धारण चुनाव कानून, दोषसिद्धि और संबंधित वैधानिक प्रावधानों के आधार पर होता है, लेकिन गिरफ्तारी वारंट और लंबित आपराधिक प्रकरण निश्चित रूप से राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी रणनीति के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
करैरा की राजनीति से जुड़ता रहा है दिनेश लोधी का नाम
दिनेश लोधी का नाम लंबे समय से करैरा विधानसभा की राजनीति से जोड़कर देखा जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही है कि पिछोर विधायक प्रीतम लोधी अपने बेटे दिनेश लोधी को करैरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं। करैरा पुलिस से जुड़े एक पुराने विवाद के दौरान भी प्रीतम लोधी की ओर से दिनेश लोधी के करैरा से चुनाव लड़ने को लेकर बयान दिए जाने की चर्चा सामने आई थी।
यही कारण है कि विशेष अदालत के ताजा आदेश को केवल कानूनी घटनाक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसका राजनीतिक असर भी देखा जा रहा है। करैरा और पिछोर दोनों विधानसभा क्षेत्रों में इस मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
यदि दिनेश लोधी लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहता है तो विपक्ष इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बना सकता है। वहीं सत्तारूढ़ दल और विधायक प्रीतम लोधी के लिए भी इस पूरे मामले पर जवाब देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या अब संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की ओर बढ़ेगा मामला?
कानूनी जानकारों के अनुसार किसी आरोपी के लगातार अदालत में उपस्थित नहीं होने और गिरफ्तारी वारंट की तामील नहीं होने की स्थिति में न्यायालय कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है। इसमें उद्घोषणा और संपत्ति कुर्की जैसी प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है। हालांकि प्रत्येक कार्रवाई न्यायालय के आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जाती है।
दिनेश लोधी के मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वह स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करता है या पुलिस उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करती है। यदि गिरफ्तारी में और देरी होती है तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
ढाई साल से वारंट, फिर भी गिरफ्तारी नहीं—अब कोर्ट के आदेश ने बढ़ाया दबाव
दिनेश लोधी के खिलाफ दिसंबर 2023 में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। इसके बाद जुलाई 2026 में स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होना यह बताता है कि मामला लंबे समय से अदालत में लंबित है और आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी है।
अब विशेष एससी-एसटी कोर्ट के आदेश के बाद ग्वालियर पुलिस पर दिनेश लोधी को तलाश कर गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ गया है। जनता से मदद मांगने और नियमानुसार इनाम घोषित करने जैसे निर्देश इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाते हैं।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद दिनेश लोधी स्वयं अदालत के सामने पेश होता है या मध्य प्रदेश पुलिस उसे गिरफ्तार करती है। साथ ही बड़ा सवाल यह भी है कि दिसंबर 2023 से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस उसे अब तक अदालत के सामने क्यों नहीं ला सकी?
अब दिनेश लोधी की गिरफ्तारी केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि शिवपुरी और ग्वालियर की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।