दुग्ध व्यापारियों ने फैट-एसएनएफ सिस्टम की उठाई मांग

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी। शिवपुरी जिले में दूध खरीद-बिक्री की व्यवस्था को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। गुरुवार को शिवपुरी दुग्ध विक्रेता व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कलेक्टर के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपते हुए जिले में दूध की खरीद केवल फैट और एसएनएफ (Solid Not Fat) आधारित प्रणाली से कराने की मांग की। संघ का कहना है कि वर्तमान में कई स्थानों पर दूध की खरीद गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच के बजाय मावा (खोया) रिकवरी के आधार पर की जा रही है, जिससे डेयरी संचालकों और दूध विक्रेताओं का आर्थिक शोषण हो रहा है।

संघ ने ज्ञापन में कहा कि यदि दूध की गुणवत्ता का निर्धारण वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया तो इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी मानक गुणवत्ता का दूध उपलब्ध नहीं हो पाएगा। इसलिए जिले में खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना आवश्यक है।

फैट और एसएनएफ सिस्टम लागू करने की मांग
दुग्ध विक्रेता व्यापारी संघ के अध्यक्ष एडवोकेट राजकुमार शाक्य ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 (FSS Act 2006) तथा एफएसएसएआई (FSSAI) के नियमों के अनुसार दूध की गुणवत्ता का निर्धारण केवल फैट और एसएनएफ की जांच के आधार पर किया जाना चाहिए। यही वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिवपुरी जिले में कई दूध उत्पादक और संग्रहकर्ता इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय मावा रिकवरी को आधार बनाकर दूध की कीमत तय की जा रही है, जिससे दूध विक्रेताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मावा रिकवरी प्रणाली पर जताई आपत्ति

संघ का कहना है कि मावा रिकवरी के आधार पर दूध खरीदना किसी भी मानक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। इससे दूध की वास्तविक गुणवत्ता का सही आकलन नहीं हो पाता और व्यापारियों को अनुचित तरीके से कम भुगतान किया जाता है।

ज्ञापन में कहा गया है कि कई बार कम फैट और अमानक गुणवत्ता वाला दूध भी बिना वैज्ञानिक जांच के बाजार में पहुंच रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

जिला प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

दुग्ध विक्रेता व्यापारी संघ ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले में तत्काल आदेश जारी कर दूध की खरीद-बिक्री केवल फैट और एसएनएफ आधारित परीक्षण प्रणाली के अनुसार कराई जाए। साथ ही मावा रिकवरी के आधार पर दूध खरीदने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

संघ का कहना है कि इससे दूध व्यापार में पारदर्शिता आएगी, गुणवत्तापूर्ण दूध की आपूर्ति सुनिश्चित होगी और डेयरी संचालकों का आर्थिक शोषण भी रुकेगा।

एफएसएसएआई के तहत अनिवार्य पंजीयन की मांग
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि जिले के सभी दूध उत्पादकों, संग्रहकर्ताओं और डेयरी संचालकों का एफएसएसएआई के तहत अनिवार्य पंजीयन कराया जाए। इससे दूध व्यापार को व्यवस्थित किया जा सकेगा और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित होगा।

संघ ने कहा कि पंजीयन व्यवस्था लागू होने से अवैध और अमानक तरीके से दूध का कारोबार करने वालों पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

नियमित सैंपलिंग और सख्त कार्रवाई की मांग

दुग्ध विक्रेता व्यापारी संघ ने खाद्य सुरक्षा विभाग से नियमित रूप से दूध के नमूने लेकर उनकी जांच कराने की मांग की है। यदि जांच में दूध अमानक पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
संघ का कहना है कि नियमित जांच से बाजार में गुणवत्तापूर्ण दूध की उपलब्धता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की भी सुरक्षा होगी।

संयुक्त निगरानी टीम गठित करने का सुझाव

संघ ने अपने ज्ञापन में यह भी प्रस्ताव रखा कि एसडीएम और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की संयुक्त निगरानी टीम गठित की जाए, जो जिलेभर में दूध खरीद-बिक्री की व्यवस्था पर नजर रखे और फैट-एसएनएफ प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू कराए।

संघ का मानना है कि संयुक्त निगरानी से नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

शिवपुरी दुग्ध विक्रेता व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जिले में खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन, फैट और एसएनएफ आधारित खरीद प्रणाली लागू कराने, मावा रिकवरी प्रथा पर रोक लगाने, सभी दूध उत्पादकों का अनिवार्य पंजीयन कराने तथा नियमित सैंपलिंग और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

संघ का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो दूध व्यापार अधिक पारदर्शी होगा, डेयरी संचालकों का आर्थिक शोषण रुकेगा, उपभोक्ताओं को मानक गुणवत्ता का दूध मिलेगा और जिले में खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित हो सकेगा।
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