शिवपुरी के TI ने पेश की अनूठी मिसाल: 50 रुपये के स्टाम्प पर आजीवन नशामुक्त और गाली-मुक्त जीवन की शपथ, नियम तोड़ा तो नौकरी छोड़ने तक को तैयार

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर आज के दौर में जहां समाज नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और भाषा में बढ़ती अभद्रता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं शिवपुरी जिले के अनुसूचित जाति-जनजाति (अजाक) थाना प्रभारी आचार्य डॉ. रणजीत सिंह रघुवंशी ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने पुलिस विभाग ही नहीं बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने 50 रुपये के गैर-न्यायिक स्टाम्प पर शपथपत्र जारी कर यह संकल्प लिया है कि वे जीवनभर किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे और किसी भी व्यक्ति के प्रति अपशब्द या गाली का प्रयोग नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, यदि भविष्य में इस संकल्प का उल्लंघन सिद्ध होता है तो वे पुलिस विभाग द्वारा सेवा से पृथक किए जाने तक पर कोई आपत्ति नहीं करेंगे।

23 जुलाई 2026 को जारी इस शपथपत्र ने जिलेभर में चर्चा का विषय बना दिया है। आमतौर पर शपथ या संकल्प मौखिक रूप से लिए जाते हैं, लेकिन डॉ. रघुवंशी ने इसे कानूनी स्वरूप देते हुए स्टाम्प पेपर पर दर्ज कराया। इससे उनके संकल्प की गंभीरता और आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है।

जीवनभर नशे से दूर रहने का संकल्प

शपथपत्र में डॉ. रणजीत सिंह रघुवंशी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि वे वर्तमान में भी किसी प्रकार का नशा या व्यसन नहीं करते हैं और जीवन की अंतिम श्वास तक ऐसा नहीं करेंगे। उन्होंने चाय, कॉफी, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू, शराब, मादक पदार्थों के साथ-साथ मांस, मछली और अंडे तक का सेवन नहीं करने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और अनुशासित जीवन ही एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान है।

गाली-मुक्त जीवन का भी लिया प्रण

डॉ. रघुवंशी ने केवल नशामुक्त जीवन की ही नहीं, बल्कि अपनी भाषा को भी पूरी तरह संयमित रखने का संकल्प लिया है। उन्होंने शपथपत्र में लिखा है कि वे किसी भी परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति के लिए अपशब्द, गाली या अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे। उनका मानना है कि पुलिस अधिकारी की वाणी में संयम और व्यवहार में शालीनता जनता का विश्वास जीतने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

स्वेच्छा से लिया ऐतिहासिक फैसला

शपथपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय उन्होंने पूरी तरह अपनी स्वेच्छा, आत्मचिंतन और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया है। किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग ने उन पर इस प्रकार का दबाव नहीं डाला है। उनका उद्देश्य स्वयं अनुशासित रहकर समाज को सकारात्मक दिशा देना है।

नियम तोड़ा तो नौकरी छोड़ने तक को तैयार

इस शपथपत्र का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित बिंदु यह है कि यदि भविष्य में उनकी किसी भी घोषणा का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो पुलिस विभाग यदि उन्हें सेवा से पृथक करता है, तब भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। किसी सरकारी अधिकारी द्वारा अपने नैतिक संकल्प को नौकरी से जोड़ देना अपने आप में बेहद दुर्लभ और साहसिक कदम माना जा रहा है।

समाज के लिए प्रेरणा बने डॉ. रघुवंशी

पुलिस का कार्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और अनुशासन का वातावरण तैयार करना भी है। डॉ. रघुवंशी का यह कदम उसी दिशा में एक प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है। उनका मानना है कि यदि पुलिस अधिकारी स्वयं अनुशासित, नशामुक्त और मर्यादित भाषा का प्रयोग करेगा तो उसका प्रभाव समाज पर भी सकारात्मक रूप से पड़ेगा।

युवाओं के लिए मजबूत संदेश

आज बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं और छोटी-छोटी बातों में अभद्र भाषा का प्रयोग सामान्य होता जा रहा है। ऐसे समय में एक पुलिस अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से आजीवन नशामुक्त और गाली-मुक्त जीवन की शपथ लेना युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। यह संदेश देता है कि असली ताकत नशे में नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और चरित्र में होती है।

जिलेभर में हो रही सराहना

डॉ. रणजीत सिंह रघुवंशी के इस अनूठे शपथपत्र की चर्चा अब पूरे शिवपुरी जिले में हो रही है। सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों द्वारा इस पहल की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समाज के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इसी प्रकार अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करें तो नशामुक्त, संस्कारित और अनुशासित समाज का सपना साकार किया जा सकता है।

एक संकल्प, जो मिसाल बन गया

पद की शक्ति से अधिक व्यक्ति के चरित्र की शक्ति महत्वपूर्ण होती है। आचार्य डॉ. रणजीत सिंह रघुवंशी ने अपने इस शपथपत्र के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से होती है। उनका यह कदम केवल एक व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरक संदेश है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो अनुशासित और आदर्श जीवन जीना कठिन नहीं है। यही कारण है कि उनका यह निर्णय आज पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे पुलिस सेवा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी उत्कृष्ट उदाहरण मान रहे हैं।

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