ट्रेन में भरोसा पड़ा भारी: UPI पिन देखकर मजदूर के खाते से उड़ाए 9 हजार रुपये, मां की तबीयत का बहाना बनाकर मोबाइल लेकर फरार हुआ ठग

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। शिवपुरी जिले के एक मजदूर के साथ ट्रेन यात्रा के दौरान ऐसी ही चौंकाने वाली साइबर ठगी की घटना सामने आई है। महाराष्ट्र से मजदूरी कर अपने गांव लौट रहे मजदूर का पहले एक युवक ने चोरी-छिपे यूपीआई (UPI) पिन देख लिया और फिर मां की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर उसका मोबाइल लेकर कुछ ही मिनटों में 9 हजार रुपये अपने परिचित के खाते में ट्रांसफर कर दिए। घटना का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार नरवर थाना क्षेत्र के ग्राम काली पहाड़ी मेड़ा श्यामपुर निवासी धनवंत सिंह बघेल महाराष्ट्र के सोलापुर स्थित एक धागा फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। 16 जुलाई को वे सोलापुर से ट्रेन के माध्यम से अपने गांव लौट रहे थे। यात्रा के दौरान एक रेलवे स्टेशन पर उन्होंने यूपीआई के जरिए भुगतान किया। इसी दौरान पास खड़े एक अज्ञात युवक ने चालाकी से उनका यूपीआई पिन देख लिया। धनवंत सिंह को उस समय इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि कोई उनकी निजी बैंकिंग जानकारी पर नजर रख रहा है।

बताया गया है कि वही युवक बाद में झांसी जाने वाली ट्रेन में भी धनवंत सिंह के पास आकर बैठ गया। उसने रास्ते भर सामान्य बातचीत कर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की। कुछ देर बाद युवक ने कहा कि उसकी मां की तबीयत अचानक खराब हो गई है और उसे तुरंत किसी परिजन से बात करनी है। उसने कुछ मिनट के लिए मोबाइल मांगते हुए मदद की गुहार लगाई।

मानवीय संवेदना और भरोसे के चलते धनवंत सिंह ने बिना किसी संदेह के अपना मोबाइल उसे दे दिया। आरोप है कि युवक ने पहले से देखे गए यूपीआई पिन का इस्तेमाल कर मोबाइल में भुगतान एप खोला और दोपहर 2:42 बजे रविकांत चौबे के मोबाइल नंबर से जुड़े यूपीआई खाते में 9 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। पूरी प्रक्रिया उसने बेहद तेजी से पूरी की ताकि पीड़ित को किसी प्रकार का संदेह न हो।

राशि ट्रांसफर करने के बाद युवक ने मोबाइल वापस लौटा दिया और कुछ देर बाद पानी लाने का बहाना बनाकर ट्रेन से उतर गया। काफी देर तक उसके वापस नहीं आने पर धनवंत सिंह को शक हुआ। जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो पता चला कि उनके खाते से 9 हजार रुपये ट्रांसफर हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने आसपास युवक की तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।

शिवपुरी पहुंचने के बाद पीड़ित ने पूरे मामले की शिकायत साइबर क्राइम प्रकोष्ठ में दर्ज कराई। उन्होंने आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और ठगी गई 9 हजार रुपये की राशि वापस दिलाने की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद साइबर टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है। संबंधित यूपीआई ट्रांजेक्शन, बैंक खाते और मोबाइल नंबर के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए लोगों को यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी सार्वजनिक स्थान पर यूपीआई पिन दर्ज करते समय कीपैड को हाथ से ढककर पिन डालें ताकि कोई उसे देख न सके। इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल, बैंकिंग एप या ओटीपी से जुड़ी जानकारी कभी भी साझा नहीं करनी चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकती है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग अब तकनीक के साथ-साथ लोगों की भावनाओं और भरोसे का भी फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में यात्रियों और आम नागरिकों को सतर्क रहने, अपनी बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना देने की आवश्यकता है। फिलहाल साइबर क्राइम प्रकोष्ठ मामले की जांच में जुटा है और आरोपी की तलाश जारी है।
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