बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी शहर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मोबाइल यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है। नबाब साहब रोड निवासी 44 वर्षीय कन्हैयालाल धाकड़ के मोबाइल की डिस्प्ले अचानक लाल हो गई और इसके बाद फोन ने काम करना बंद कर दिया। पीड़ित को जब तक अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला, तब तक उनके फोनपे खाते से दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 1 लाख 87 हजार रुपए ट्रांसफर किए जा चुके थे।
पीड़ित कन्हैयालाल धाकड़ ने इस मामले की शिकायत शिवपुरी कोतवाली पुलिस से की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। खास बात यह है कि पुलिस के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र में मोबाइल के साथ छेड़छाड़ या संदिग्ध तरीके से डिजिटल भुगतान के जरिए रकम निकालने का यह तीसरा मामला सामने आया है।
अचानक लाल हुई मोबाइल की डिस्प्ले
कन्हैयालाल धाकड़ ने पुलिस को बताया कि वह नबाब साहब रोड पर आरा मशीन के पास रहते हैं। 5 अगस्त की शाम करीब 4 बजे उनके मोबाइल की डिस्प्ले अचानक लाल हो गई। इसके बाद मोबाइल ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने मोबाइल को सामान्य तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन फोन में कोई गतिविधि नहीं हुई।
इसके अगले दिन 6 अगस्त की शाम करीब 4:36 बजे भी मोबाइल की डिस्प्ले लाल दिखाई दी और फोन बंद हो गया। उस समय भी उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके मोबाइल और डिजिटल पेमेंट खाते के साथ कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही है।
पेमेंट करने पहुंचे तो सामने आया ठगी का सच
कन्हैयालाल के अनुसार, 6 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे उन्हें महावीर इंटरप्राइजेज को फोनपे के माध्यम से भुगतान करना था। उन्होंने अपने मोबाइल से पेमेंट करने की कोशिश की, लेकिन ट्रांजेक्शन पूरा नहीं हुआ।
फोनपे पर उन्हें 'ट्रांजेक्शन की लिमिट खत्म' होने का मैसेज दिखाई दिया। इस मैसेज के बाद उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने फोनपे की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक की तो उनके होश उड़ गए।
ट्रांजेक्शन हिस्ट्री में दो ऐसे भुगतान दिखाई दिए, जो उनके द्वारा किए ही नहीं गए थे।
दो दिन में दो बार निकाले रुपए
ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड के मुताबिक, 5 अगस्त को UTR नंबर 027417040413 के जरिए 90 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 6 अगस्त को UTR नंबर 438781521083 के जरिए 97 हजार रुपए और ट्रांसफर कर दिए गए।
इस तरह महज दो दिनों के भीतर कन्हैयालाल के फोनपे खाते से कुल 1 लाख 87 हजार रुपए निकाल लिए गए।
पीड़ित का आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके मोबाइल को हैक या किसी अन्य तकनीकी तरीके से अपने नियंत्रण में लेकर उनके डिजिटल भुगतान खाते से रकम ट्रांसफर की है।
न OTP बताया, न खुद किया ट्रांजेक्शन
कन्हैयालाल का कहना है कि उन्होंने ये दोनों ट्रांजेक्शन खुद नहीं किए। मोबाइल की डिस्प्ले लाल होने और फोन के काम करना बंद करने के बाद ही उनके खाते से रकम ट्रांसफर हुई। यही वजह है कि उन्हें संदेह है कि साइबर ठगों ने किसी तकनीकी तरीके से उनके मोबाइल या डिजिटल पेमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाई।
हालांकि ठगी किस तकनीकी तरीके से की गई और रकम किस खाते में ट्रांसफर हुई, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
कोतवाली में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी
पुलिस के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र में इस तरह की साइबर ठगी का यह तीसरा मामला है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पीड़ितों के मोबाइल या डिजिटल बैंकिंग सिस्टम से बिना उनकी जानकारी के बड़ी रकम ट्रांसफर हुई।
इन मामलों ने साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे समय में जब अधिकांश लोग मोबाइल से ही बैंकिंग, फोनपे, यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पहले अरविंद धाकड़ के खाते से निकले थे 2.94 लाख
इससे पहले नामोनगर निवासी अरविंद धाकड़ के खाते से भी साइबर ठगी का मामला सामने आया था। बताया गया था कि उनके खाते से महज पांच मिनट के भीतर 2.94 लाख रुपए निकाल लिए गए।
खास बात यह थी कि पीड़ित के अनुसार उन्होंने न तो कोई OTP किसी को बताया था, न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था और न ही कोई नया ऐप डाउनलोड किया था। इसके बावजूद उनके खाते से बड़ी रकम निकल गई।
हार्डवेयर कारोबारी के खाते से भी उड़ाए 1.01 लाख
इसी तरह अग्रवाल धर्मशाला रोड निवासी हार्डवेयर कारोबारी विकास गोयल भी साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उनके खाते से अज्ञात कॉल रिसीव करने के बाद 1.01 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
इस मामले ने भी लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि साइबर ठग किस तरह अलग-अलग तरीकों से लोगों के मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम को निशाना बना रहे हैं।
भौंती में अपडेटिंग के बाद डिलीट हुआ था डेटा
भौंती थाना क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है। भौंती निवासी शिवम गुप्ता के मोबाइल में अचानक अपडेटिंग शुरू हुई और इसके बाद मोबाइल का पूरा डेटा डिलीट हो गया। बाद में उनके दो बैंक खातों से करीब 99 हजार रुपए निकाल लिए गए।
इन घटनाओं को देखते हुए साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की ओर से लोगों को मोबाइल में आने वाले संदिग्ध लिंक, अनजान ऐप, स्क्रीन शेयरिंग, रिमोट एक्सेस और संदिग्ध कॉल से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
पुलिस जांच में सामने आएगा ठगी का तरीका
कन्हैयालाल धाकड़ की शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब ट्रांजेक्शन की जानकारी, UTR नंबर, संबंधित खातों और मोबाइल की तकनीकी गतिविधियों की जांच कर रही है।
यह भी पता लगाया जा रहा है कि रकम किन खातों में पहुंची और मोबाइल की डिस्प्ले लाल होने तथा फोन बंद होने के पीछे क्या तकनीकी कारण था। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ठगी किस तरीके से की गई।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच मोबाइल यूजर्स के लिए यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। डिजिटल भुगतान करते समय किसी भी अनजान लिंक, ऐप, कॉल या स्क्रीन शेयरिंग रिक्वेस्ट को स्वीकार करना भारी पड़ सकता है।