400 किलोमीटर दौड़कर कांवड़ यात्रा पर निकले 50 से ज्यादा श्रद्धालु:48 घंटे में दूरी पूरी करने का लक्ष्य

Nikk Pandit
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डाक कांवड़ की अनोखी यात्रा: धावक लगातार दौड़ते हुए संभाल रहे कांवड़, बाइक से हो रहा धावकों का बदलाव; 11 अगस्त को खेरौना के पहाड़ वाले शिव मंदिर में होगा जलाभिषेक

बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर सावन माह में भगवान शिव की भक्ति और आस्था का एक अनोखा नजारा शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के खेरौना गांव में देखने को मिल रहा है। गांव के करीब 50 से 55 युवा और ग्रामीण लगभग 400 किलोमीटर की डाक कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। श्रद्धालुओं ने सोरों जी के कचला घाट से कांवड़ में पवित्र जल भरकर यात्रा शुरू की है। दल का लक्ष्य करीब 48 घंटे में 400 किलोमीटर की दूरी तय कर खेरौना पहुंचना है।

यात्रा पूरी होने के बाद 11 अगस्त को खेरौना गांव के पहाड़ वाले शिव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। खास बात यह है कि इस पूरी यात्रा में कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाएगा। श्रद्धालु बारी-बारी से दौड़ते हुए कांवड़ को आगे बढ़ा रहे हैं।

डाक कांवड़ में लगातार दौड़ते हैं श्रद्धालु

इस यात्रा को सामान्य कांवड़ यात्रा से अलग बनाने वाली सबसे बड़ी विशेषता इसकी रफ्तार और व्यवस्था है। डाक कांवड़ में श्रद्धालु कांवड़ लेकर लगातार दौड़ते रहते हैं। एक धावक कुछ दूरी तक कांवड़ लेकर दौड़ता है, इसके बाद दूसरा धावक उसकी जगह कांवड़ संभाल लेता है।

दूसरे धावक को समय पर कांवड़ तक पहुंचाने के लिए बाइक का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाइक से अगला धावक पहले वाले धावक तक पहुंचता है और कांवड़ उसके सुपुर्द कर दी जाती है। इसके बाद नया धावक दौड़ना शुरू कर देता है। इस तरह कांवड़ की यात्रा लगातार जारी रहती है।

श्रद्धालुओं का संकल्प है कि कांवड़ को भगवान शिव के मंदिर तक पहुंचने तक जमीन पर नहीं रखा जाएगा। इसके लिए पूरे यात्रा दल ने आपसी तालमेल और जिम्मेदारियां तय की हैं।

भोजन के समय भी नहीं रुकती कांवड़

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार लंबी दूरी तय करने की है। करीब 400 किलोमीटर की दूरी 48 घंटे में पूरी करने के लिए दल को खाने-पीने और आराम के लिए भी विशेष व्यवस्था करनी पड़ रही है।

यात्रा दल के अनुसार जब अन्य श्रद्धालु भोजन या जलपान के लिए रुकते हैं, तब भी कांवड़ लेकर चलने वाला धावक रुकता नहीं है। वह निर्धारित स्थान पर गोल घेरे में लगातार दौड़ता रहता है। बाकी श्रद्धालुओं के भोजन और जलपान करने के बाद दल फिर यात्रा की दिशा में आगे बढ़ता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य कांवड़ की निरंतरता बनाए रखना और यात्रा के संकल्प को पूरा करना है।

50 से 55 युवाओं की बनाई गई समिति

इस अनोखी डाक कांवड़ यात्रा को सफल बनाने के लिए खेरौना गांव के करीब 50 से 55 युवाओं और ग्रामीणों की समिति बनाई गई है। सभी सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। कोई कांवड़ लेकर दौड़ रहा है तो कोई बाइक से धावकों के बदलाव में मदद कर रहा है। यात्रा दल की आवश्यक सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं के लिए वाहन भी साथ चल रहे हैं।

यात्रा में लगभग 10 बाइक और एक पिकअप वाहन शामिल हैं। पिकअप वाहन में यात्रा के दौरान आवश्यक सामान रखा गया है, जबकि बाइक का उपयोग मुख्य रूप से धावकों को समय पर कांवड़ तक पहुंचाने और यात्रा के संचालन में किया जा रहा है।

खेरौना से कचला घाट तक पहुंचे थे श्रद्धालु

यात्रा दल के सदस्य पहले 7 अगस्त को खेरौना गांव के पहाड़ वाले शिव मंदिर से रवाना होकर सोरों जी के कचला घाट पहुंचे थे। वहां पहुंचने के बाद पवित्र जल लेकर डाक कांवड़ यात्रा की शुरुआत की गई।

सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के प्रति आस्था से ओतप्रोत होकर श्रद्धालु अब कचला घाट से खेरौना की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते में लोगों को जब इस अनोखी कांवड़ यात्रा की जानकारी मिल रही है तो वे भी श्रद्धालुओं के उत्साह की सराहना कर रहे हैं।

48 घंटे में 400 किलोमीटर पूरा करने का लक्ष्य

यात्रा दल ने करीब 48 घंटे में 400 किलोमीटर की दूरी पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इतनी लंबी दूरी कम समय में पूरी करने के लिए धावकों के बीच लगातार तालमेल बनाए रखना बेहद जरूरी है।

एक धावक के थकने से पहले दूसरा धावक उसकी जगह लेने के लिए तैयार रहता है। बाइक सवार पहले से ही अगले धावक को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने में जुटे रहते हैं। इस पूरी व्यवस्था के चलते कांवड़ यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल दूरी तय करने का प्रयास नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था, संकल्प और समर्पण का प्रतीक है। यात्रा के दौरान सभी सदस्य एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं और निर्धारित समय में खेरौना पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

11 अगस्त को होगा भगवान शिव का जलाभिषेक

यात्रा का अंतिम पड़ाव खेरौना गांव का पहाड़ वाले शिव मंदिर रहेगा। श्रद्धालुओं का लक्ष्य है कि 11 अगस्त को मंदिर पहुंचकर कांवड़ में लाए गए पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाए।

लगभग 400 किलोमीटर की दूरी दौड़ते हुए पूरी करने वाली इस डाक कांवड़ यात्रा को लेकर खेरौना गांव में भी उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों और युवाओं ने इस धार्मिक यात्रा को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी की है।

सावन के महीने में आस्था, अनुशासन और सामूहिक प्रयास की यह डाक कांवड़ यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि 50 से ज्यादा श्रद्धालुओं का यह दल अपने संकल्प के अनुसार निर्धारित समय में खेरौना पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक कब और किस तरह करता है।
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