बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी सर्किल जेल में पदस्थ हेड कांस्टेबल मोहन सिंह बाथम की जहरीला पदार्थ पीने के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने जेल विभाग में हड़कंप मचा दिया है। परिजनों ने जेल के कुछ कर्मचारियों पर मानसिक प्रताड़ना करने और करण नामक युवक पर ब्लैकमेल करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, ग्वालियर निवासी मोहन सिंह बाथम शिवपुरी की सर्किल जेल में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ थे। गुरुवार सुबह करीब 9 बजे वह घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। दोपहर 12 बजे उनकी ड्यूटी शुरू होनी थी, लेकिन तय समय पर वह जेल नहीं पहुंचे। काफी देर तक संपर्क नहीं होने पर जेल कर्मचारियों ने उनके घर पहुंचकर पत्नी ममता बाथम से जानकारी ली। पत्नी ने बताया कि मोहन सिंह सुबह घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। इसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई।
कुछ समय बाद मोहन सिंह शिवपुरी के इंडस्ट्रियल एरिया में बेहोशी की हालत में मिले। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उन्होंने वाहनों की सफाई में इस्तेमाल होने वाला लिक्विड शाइनर पी लिया था। उन्हें तत्काल शिवपुरी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्वालियर रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। इसके बाद ग्वालियर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
घटना के बाद मृतक के बेटे ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि उसके पिता लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। इलाज के लिए उन्हें अवकाश की आवश्यकता थी, लेकिन कई बार आवेदन देने के बावजूद छुट्टी स्वीकृत नहीं की गई। बेटे के अनुसार, उनकी मां ममता बाथम ने भी अधिकारियों से छुट्टी मंजूर करने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। परिवार का आरोप है कि लगातार ड्यूटी और मानसिक तनाव ने उनकी स्थिति को और खराब कर दिया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मोहन सिंह अपने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद के कारण भी मानसिक रूप से परेशान थे। बेटे का कहना है कि इस मामले को लेकर जेल के कुछ कर्मचारी उन्हें बार-बार ताने मारते थे, जिससे वे लगातार तनाव में रहते थे। इसके अलावा परिवार ने करण नामक एक युवक पर भी आरोप लगाया है कि वह इसी विवाद को लेकर मोहन सिंह को ब्लैकमेल कर रहा था। परिजनों का दावा है कि इन सभी परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया और अंततः उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी और यदि जांच में प्रताड़ना, ब्लैकमेल या किसी अन्य प्रकार की लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने सरकारी कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल के वातावरण और अवकाश संबंधी व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोहन सिंह बाथम को आत्मघाती कदम उठाने के लिए किन परिस्थितियों ने मजबूर किया और क्या परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं।