खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के सड़खड़पुर गांव के एक परिवार पर शनिवार सुबह उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब देश की सेवा में तैनात 33 वर्षीय आर्मी हवलदार राजेश यादव की बेंगलुरु आर्मी बेस में करंट लगने से मौत हो गई। राजेश शनिवार तड़के करीब 4 बजे ड्यूटी के लिए जा रहे थे, तभी तेज आंधी के कारण टूटकर गिरे बिजली के तार की चपेट में आ गए। साथी जवान उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
राजेश यादव की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव सड़खड़पुर पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। जिस जवान ने करीब 18 साल तक भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा की, उसकी अचानक हुई मौत ने परिवार और ग्रामीणों को झकझोर दिया है।
शुक्रवार रात आंधी ने बिछाया था खतरा
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु स्थित आर्मी एरिया में शुक्रवार रात तेज आंधी चली थी। इसी दौरान बिजली का एक तार टूटकर जमीन पर गिर गया। रात होने के कारण यह खतरा तत्काल नजर नहीं आया। शनिवार सुबह राजेश यादव रोज की तरह अपनी ड्यूटी के लिए निकले थे।
बताया जा रहा है कि सुबह करीब 4 बजे ड्यूटी पर जाते समय वह टूटे हुए बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगते ही वह गंभीर रूप से झुलस गए और मौके पर ही बेसुध हो गए। आसपास मौजूद साथी जवानों ने तत्काल उन्हें संभाला और अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के प्रयास किए, लेकिन उनकी हालत बेहद गंभीर थी। उपचार से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद सेना के अधिकारियों और जवानों ने परिवार को हादसे की सूचना दी।
2008 में सेना में हुए थे भर्ती
राजेश यादव का सेना से रिश्ता करीब दो दशक पुराना था। वह वर्ष 2008 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर सेवाएं दीं। बताया गया है कि राजेश कश्मीर में भी तैनात रह चुके थे।
करीब 18 वर्षों की सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। पिछले करीब एक वर्ष से उनकी पोस्टिंग बेंगलुरु आर्मी बेस में थी। वह नियमित रूप से अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
साथी जवानों के बीच भी राजेश के अचानक चले जाने से शोक का माहौल है। एक सामान्य ड्यूटी के लिए निकले जवान के साथ कुछ ही पलों में ऐसा हादसा हुआ कि परिवार को उनकी मौत की खबर मिली।
पीछे रह गए पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता
राजेश यादव अपने पीछे पत्नी, 12 वर्षीय बेटी और 7 वर्षीय बेटे सहित परिवार को छोड़ गए हैं। दोनों बच्चे गांव में अपनी मां और दादा-दादी के साथ रहते हैं।
परिवार के लिए राजेश सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि घर की बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले सदस्य भी थे। बच्चों के सिर से पिता का साया अचानक उठ जाने से परिवार गहरे सदमे में है। गांव में जैसे ही राजेश की मौत की खबर पहुंची, उनके परिचित और ग्रामीण परिवार के घर पहुंचने लगे।
परिजनों को अब उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार है।
रविवार को बेंगलुरु में पोस्टमार्टम
जानकारी के अनुसार राजेश यादव के शव का रविवार को बेंगलुरु में पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को बेंगलुरु से ग्वालियर एयरपोर्ट लाए जाने की संभावना है।
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव सड़खड़पुर लाया जाएगा, जहां मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी है।
अंतिम विदाई के दौरान सेना के जवानों की मौजूदगी में राजेश को सैन्य सम्मान दिया जाएगा। गांव के लोग भी बड़ी संख्या में उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
देश की सेवा करते-करते गांव लौटेगा वीर जवान
राजेश यादव की जिंदगी का बड़ा हिस्सा भारतीय सेना की सेवा में बीता। वर्ष 2008 में सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने करीब 18 वर्षों तक देश की जिम्मेदारी निभाई। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं देने वाले राजेश की मौत किसी सीमा पर नहीं, बल्कि ड्यूटी पर जाते समय एक टूटे बिजली के तार की चपेट में आने से हुई।
एक तरफ परिवार ने अपना बेटा, पति और पिता खो दिया, वहीं गांव ने देश की सेवा करने वाले अपने जवान को खो दिया है।
फिलहाल हादसे के बाद बिजली के तार टूटने की परिस्थितियों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी संबंधित स्तर पर सामने आना बाकी है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत से जुड़े चिकित्सकीय तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
शिवपुरी के सड़खड़पुर गांव का यह जवान अब तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटेगा। जिस राजेश ने 18 साल वर्दी पहनकर देश की सेवा की, उसे मंगलवार को उसके अपने गांव की मिट्टी सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई देगी।