खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के करैरा जनपद क्षेत्र की सिरसौद पंचायत के नए अमोला गांव में मंगलवार शाम शराब के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं गांव में कथित तौर पर कच्ची शराब बेचने वाले ठिकाने पर पहुंचीं और वहां रखी शराब को सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद महिलाओं का जत्था सरकारी शराब दुकान तक पहुंच गया, जहां उन्होंने दुकान में रखी शराब की पेटियां बाहर निकालकर उनमें आग लगा दी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
महिलाओं का कहना है कि गांव में शराब का चलन लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर परिवारों पर पड़ रहा है। शराब पीने के बाद घरों में विवाद, मारपीट और घरेलू हिंसा की स्थिति बनने का आरोप महिलाओं ने लगाया। महिलाओं ने साफ कहा कि वे अपने गांव में शराब की बिक्री और इसके कारण पैदा हो रही सामाजिक समस्याओं को और बढ़ने नहीं देंगी।
पहले कच्ची शराब के ठिकाने पर पहुंचीं महिलाएं
मंगलवार शाम महिलाओं ने एकजुट होकर गांव में कथित रूप से कच्ची शराब बेचने वाले ठिकाने का रुख किया। महिलाओं के पहुंचते ही वहां माहौल गरमा गया। महिलाओं ने वहां रखी कच्ची शराब को सड़क पर फेंक दिया।
महिलाओं का कहना था कि गांव में खुले तौर पर शराब की बिक्री होने से युवाओं और परिवारों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनका आरोप है कि शराब की वजह से कई घरों में आए दिन विवाद की स्थिति बनती है और इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने शराब के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और गांव में शराब की बिक्री बंद कराने की मांग उठाई।
सरकारी शराब दुकान पर भी पहुंचा महिलाओं का जत्था
कच्ची शराब के ठिकाने के बाद महिलाओं का गुस्सा सरकारी शराब दुकान तक पहुंच गया। बड़ी संख्या में महिलाएं शराब दुकान पर पहुंचीं और वहां रखी शराब की पेटियां बाहर निकाल लीं।
इसके बाद महिलाओं ने शराब की पेटियों में आग लगा दी। घटना का वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है। शराब की पेटियां जलाए जाने और सड़क पर शराब बहाए जाने की घटना के बाद क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।
हालांकि, सार्वजनिक या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने अथवा शराब की दुकान में रखे माल को नष्ट करने जैसी घटनाओं में कानून अपने स्तर पर कार्रवाई करता है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में शामिल लोगों की भूमिका क्या रही और किस तरह की कानूनी कार्रवाई बनती है।
सागर की जहरीली शराब की घटना का भी दिया हवाला
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने हाल ही में सागर में सामने आई जहरीली शराब की घटना का भी जिक्र किया। महिलाओं ने कहा कि जहरीली शराब से होने वाली घटनाएं परिवारों के लिए बेहद गंभीर खतरा हैं।
महिलाओं का कहना था कि किसी बड़ी घटना का इंतजार करने के बजाय गांव में शराब की बिक्री पर अभी से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शराब की वजह से होने वाले नुकसान को वे अपने गांव में बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं।
इसी सोच के साथ महिलाओं ने शराब के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने का फैसला किया।
अमोला थाना पुलिस मौके पर पहुंचा
घटना की सूचना मिलते ही अमोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस बल ने मौके की स्थिति को संभाला और हालात को नियंत्रण में लिया।
अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि पुलिस बल मौके पर मौजूद है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि यदि शराब ठेकेदार की ओर से शिकायत प्राप्त होती है तो मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के सामने अब घटना से जुड़े वीडियो, मौके की स्थिति और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करना अहम होगा।
पंचायत में भी शराब के खिलाफ प्रस्ताव की तैयारी
शराब के खिलाफ महिलाओं के प्रदर्शन के साथ-साथ सिरसौद पंचायत में भी ग्रामीण स्तर पर शराब के खिलाफ मुहिम तेज होने की बात सामने आई है।
सिरसौद पंचायत के सरपंच अतर सिंह लोधी ने ग्रामीणों को अवैध और कच्ची शराब के खिलाफ एकजुट किया। बताया गया कि सरपंच ने सिरसौद गांव के ग्रामीणों के साथ मंदिर में पंचायत की और शराब की बिक्री तथा सप्लाई के खिलाफ सामूहिक निर्णय लेने की बात कही।
सरपंच का कहना है कि यदि गांव में कोई व्यक्ति अवैध या कच्ची शराब बेचता अथवा उसकी सप्लाई करता पाया जाता है तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
शराब बेचने वालों के बहिष्कार का ऐलान
सरपंच ने ग्रामीणों से कहा कि शराब बेचने या सप्लाई करने वाले व्यक्ति को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण भी ऐसे लोगों के आयोजनों में शामिल नहीं होंगे।
सरपंच ने शराब की बिक्री को समाज के लिए गंभीर कृत्य बताते हुए बेहद कड़ी भाषा में इसकी निंदा की। उन्होंने इसे गौहत्या के समान मानने की बात कही।
हालांकि सामाजिक बहिष्कार के किसी भी कदम को लागू करते समय कानून और प्रशासनिक व्यवस्था का पालन जरूरी है। ग्रामीणों की नाराजगी अपनी जगह है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार संबंधित कानूनी संस्थाओं के पास ही होता है।
महिलाओं के प्रदर्शन ने खड़े किए बड़े सवाल
नए अमोला में महिलाओं के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर गांवों में शराब की उपलब्धता और उससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि शराब की वजह से सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि इसका असर परिवार के माहौल, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की सुरक्षा तक पड़ सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस और आबकारी विभाग महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की कितनी गंभीरता से जांच करते हैं और गांव में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
महिलाओं का यह प्रदर्शन भले ही आक्रोश में सामने आया हो, लेकिन इसके पीछे उठाई गई समस्याएं प्रशासन के लिए गंभीर संदेश हैं। यदि गांव में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें हैं, तो केवल प्रदर्शन के बाद स्थिति संभालना पर्याप्त नहीं होगा; अवैध शराब के स्रोत, बिक्री और सप्लाई की जांच कर प्रभावी कार्रवाई करना भी जरूरी होगा।