एनएच-46 पर फिर खून से लाल हुई सड़क:ट्रकों ने 7 गौवंश को रौंदा

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले से गुजरने वाले एनएच-46 पर गौवंश की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों के बीच मंगलवार को फिर दर्दनाक तस्वीर सामने आई। कोलारस इलाके में हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर हुए दो सड़क हादसों में तेज रफ्तार ट्रकों ने 7 गायों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसों में 5 गौवंश की मौत हो गई, जबकि 2 गंभीर रूप से घायल हो गए। लगातार हो रहे हादसों ने एक बार फिर हाईवे पर खुले में घूमते और सड़क पर बैठते गौवंश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि पहला हादसा लुकवासा चौकी क्षेत्र के देहरदा ओवरब्रिज पर हुआ, जबकि दूसरा हादसा बदरवास थाना क्षेत्र के सुमेला गांव के पास एनएच-46 पर हुआ। दोनों घटनाओं में ट्रकों की चपेट में आने से गौवंश की मौत हुई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन की ओर से हाईवे और सड़कों पर गौवंश को बैठने से रोकने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा।

देहरदा ओवरब्रिज पर 5 गायों को ट्रक ने रौंदा

पहला और सबसे दर्दनाक हादसा लुकवासा चौकी क्षेत्र के देहरदा ओवरब्रिज पर हुआ। जानकारी के मुताबिक शिवपुरी से गुना की ओर जा रहे एक ट्रक की चपेट में सड़क पर बैठी 5 गायें आ गईं।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक की चपेट में आने के बाद गौवंश काफी दूर तक घिसटता चला गया। हादसे में 4 गायों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गाय गंभीर रूप से घायल हो गई।

हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सड़क पर गौवंश के शव और घायल गाय को देखकर वहां से गुजरने वाले लोग भी परेशान नजर आए। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया कि आखिर हाईवे पर बैठे गौवंश को हटाने और उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम क्यों नहीं कर पा रही है।

सुमेला के पास भी ट्रक ने 2 गायों को मारी टक्कर
दूसरा हादसा बदरवास थाना क्षेत्र के सुमेला गांव के पास हुआ। यहां भी एनएच-46 पर सड़क पर मौजूद दो गायें तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गईं।

टक्कर में एक गाय की मौत हो गई, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई। लगातार एक ही दिन में दो अलग-अलग स्थानों पर गौवंश के साथ हुए हादसों ने हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार सुमेला गांव के पास गौशाला मौजूद होने के बावजूद बड़ी संख्या में गौवंश हाईवे के आसपास और सड़क पर बैठा रहता है। ऐसे में रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक गौवंश आने से हादसे का खतरा लगातार बना रहता है।

गौशाला के बावजूद हाईवे पर क्यों बैठ रहा गौवंश?

सुमेला क्षेत्र में गौशाला होने के बावजूद सड़क पर गौवंश की मौजूदगी स्थानीय स्तर पर बड़ा सवाल बन गई है। लोगों का कहना है कि यदि गौशाला में पर्याप्त व्यवस्था है
तो फिर बड़ी संख्या में मवेशी हाईवे तक कैसे पहुंच रहे हैं?

हाईवे पर बैठे गौवंश के कारण वाहन चालकों के सामने भी अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति बनती है। इससे केवल मवेशियों के ही नहीं, बल्कि वाहन सवार लोगों के लिए भी गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

खासकर रात के समय हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर बैठे काले या गहरे रंग के मवेशी दूर से दिखाई नहीं देते। ऐसे में वाहन और गौवंश के बीच टक्कर की आशंका और बढ़ जाती है।

इस सीजन में 50 से ज्यादा गौवंश की मौत का दावा
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, इस सीजन में एनएच-46 पर अब तक 50 से ज्यादा गौवंश सड़क हादसों में जान गंवा चुका है। यदि यह आंकड़ा सही है तो यह बेहद गंभीर स्थिति है।

एक तरफ सरकार और प्रशासन गौवंश संरक्षण को लेकर लगातार योजनाएं और निर्देश जारी करता है, वहीं दूसरी ओर हाईवे पर मवेशियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सवाल यही है कि आखिर संरक्षण की व्यवस्थाएं कागजों से निकलकर सड़क तक कब पहुंचेंगी?

कलेक्टर के आदेश के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
गौवंश को सड़कों और हाईवे पर बैठने से रोकने के लिए प्रशासन की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा भी गौवंश को सड़कों पर बैठने से रोकने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।

इसके बावजूद मंगलवार को एक ही दिन में दो स्थानों पर 7 गौवंश का हादसे का शिकार होना इन निर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।

अब जरूरत केवल आदेश जारी करने की नहीं, बल्कि उनकी सख्ती से निगरानी और पालन कराने की है। हाईवे के संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां गौवंश को हटाने, गौशालाओं में पहुंचाने और रात के समय विशेष निगरानी की व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है।

सवालों के घेरे में व्यवस्था

एनएच-46 पर मंगलवार को हुए दोनों हादसों ने एक बार फिर व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर सड़क पर बैठे गौवंश की जिम्मेदारी किसकी है?

एक तरफ तेज रफ्तार वाहन हैं, दूसरी तरफ हाईवे पर बैठे बेसहारा मवेशी। बीच में हर दिन गुजरती जिंदगी। ऐसे में छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

फिलहाल मंगलवार के दोनों हादसों में 5 गौवंश की मौत और 2 के गंभीर घायल होने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो एनएच-46 पर हादसों का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

अब सवाल सिर्फ गौवंश की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो आदेशों के बावजूद हाईवे को मवेशियों से सुरक्षित नहीं कर पा रही है।
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