शिवपुरी में शराब के खिलाफ चौथे दिन भी उबाल:पचावली में दुकान में घुसीं महिलाएं:पेटियां नाले में फेंकीं; खोड़ में 5 घंटे चक्काजाम

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले में शराब के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार चौथे दिन शुक्रवार को भी जिले के अलग-अलग इलाकों में शराब की बिक्री के विरोध में जमकर हंगामा हुआ। कहीं महिलाओं ने सरकारी शराब दुकान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दुकान का दरवाजा तोड़ दिया और अंदर रखी शराब की पेटियां बाहर निकालकर नाले में फेंक दीं, तो दूसरी ओर आदिवासी महिलाओं ने कच्ची शराब की बिक्री बंद कराने की मांग को लेकर करीब पांच घंटे तक सड़क पर चक्काजाम कर दिया।

शराब के खिलाफ लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से प्रशासन और पुलिस के सामने भी स्थिति संभालने की चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक असर पड़ रहा है, इसलिए गांवों में शराब की बिक्री बंद होनी चाहिए।

पचावली में शराब दुकान पर महिलाओं का धावा

शुक्रवार सुबह रन्नौद थाना क्षेत्र के पचावली गांव में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शराब की सरकारी दुकान के विरोध में पहुंच गए। ग्रामीणों ने शराब की बिक्री बंद कराने की मांग को लेकर विरोध शुरू किया।

विरोध के दौरान स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब दुकान का दरवाजा तोड़ दिया गया और महिलाएं दुकान के अंदर पहुंच गईं। महिलाओं ने वहां रखी शराब की पेटियां बाहर निकालना शुरू कर दिया। इसके बाद शराब की पेटियों को नाले की ओर ले जाकर शराब को बहा दिया गया।

घटना के दौरान मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई।
 बताया जा रहा है कि कुछ पुरुषों द्वारा शराब अपने साथ ले जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की जांच और वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

महिलाओं का आरोप—शराब से परिवार हो रहे बर्बाद
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शराब की बिक्री की वजह से लोगों के घरों पर बुरा असर पड़ रहा है। शराब के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं। इसी वजह से ग्रामीण लंबे समय से शराब की बिक्री बंद कराने की मांग कर रहे हैं।

महिलाओं का कहना है कि वे अपने गांव और परिवारों को शराब के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हुई हैं। उनका विरोध सिर्फ दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे गांव में शराब की बिक्री पूरी तरह बंद कराने की मांग कर रही हैं।

खोड़-सिरसौद मार्ग पर पांच घंटे तक चक्काजाम
इधर खोड़ चौकी क्षेत्र में भी कच्ची शराब की बिक्री के खिलाफ आदिवासी महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया। चंदावानी पंचायत के श्रीवरी मजरे की महिलाओं ने शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे खोड़-सिरसौद मार्ग पर पहुंचकर चक्काजाम कर दिया।

महिलाएं सड़क पर बैठ गईं और कच्ची शराब की बिक्री बंद कराने की मांग करने लगीं। चक्काजाम के कारण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लगने लगीं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने महिलाओं से बातचीत की और उनकी शिकायतों को सुना। काफी देर तक समझाइश और बातचीत के बाद करीब 11 बजे चक्काजाम समाप्त कराया गया।

इस तरह करीब पांच घंटे तक खोड़-सिरसौद मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा।

अमोलपठा में हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई
शराब के खिलाफ विरोध का यह सिलसिला पिछले दिनों अमोला थाना क्षेत्र के अमोलपठा में भी देखने को मिला था। यहां शराब दुकान में तोड़फोड़, मारपीट और आगजनी के मामले ने गंभीर रूप ले लिया था।

इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुल 25 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। पुलिस के अनुसार मामले में शामिल अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अमोलपठा मामले में नामजद किए गए लोगों में छोटेराजा गुर्जर, दुष्यंत परमार, कमल सिंह गुर्जर, दीवान सिंह बघेल, मख्खन नामदेव, राहुल जाटव, शंकर जाटव, अजय जाटव, राहुल खटीक, अज्जू उर्फ अजय बाल्मीकि, राहुल बाल्मीकि, मुस्कान बाल्मीकि, रीना बाल्मीकि, राजेश खटीक, धर्मेंद्र खटीक, ललिता आदिवासी, वकील आदिवासी, दीपक वंशकार, भूरा नामदेव, मलखान जाटव, संजय वंशकार, दीपक मेहतर, कालिया मेहतर, जशरथ जाटव और अंशुल जाटव शामिल हैं।

चार दिन से लगातार बढ़ रहा विरोध

शिवपुरी जिले में शराब के खिलाफ लगातार चौथे दिन हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अलग-अलग गांवों में महिलाएं और ग्रामीण शराब की बिक्री के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं।

एक तरफ पचावली में महिलाओं द्वारा शराब दुकान के अंदर घुसकर विरोध किया गया, तो दूसरी तरफ खोड़ क्षेत्र में महिलाओं ने सड़क पर बैठकर कच्ची शराब के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। वहीं अमोलपठा में हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद पुलिस की गिरफ्तारी कार्रवाई जारी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीणों के लगातार विरोध के बावजूद शराब की बिक्री को लेकर उठ रहे विवाद का स्थायी समाधान कब निकलेगा? ग्रामीण प्रशासन से सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि गांवों में शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक और उनके परिवारों को शराब के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि शराब विरोधी आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित किया जाए और कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। वहीं, ग्रामीणों का विरोध देखकर साफ है कि शराब का मुद्दा अब सिर्फ दुकान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गांवों की महिलाओं और परिवारों के लिए बड़ा सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।
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