राजधानी से आई विशेष जांच किट से 6 तरह की मिलावट की होगी तुरंत जांच;संदिग्ध नमूने ही जाएंगे भोपाल:जिले में रोज करीब 2 लाख लीटर दूध की खपत

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी दूध के नाम पर कहीं पानी, कहीं पाउडर और कहीं दूसरे पदार्थों की मिलावट की आशंका अब आसानी से छिप नहीं सकेगी। शिवपुरी जिले में बिकने वाले दूध की शुद्धता जांचने के लिए राजधानी की खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग की लैब से विशेष जांच किट शिवपुरी पहुंच गई है। इस किट में अलग-अलग केमिकल और टेस्ट स्ट्रिप मौजूद हैं, जिनकी मदद से दूध में 6 तरह की मिलावट का मौके पर ही पता लगाया जा सकेगा।

अब तक दूध का सैंपल लेने के बाद उसे जांच के लिए भोपाल भेजना पड़ता था। रिपोर्ट आने में समय लगता था और तब तक दूध बाजार में बिक भी चुका होता था। नई व्यवस्था में प्राथमिक जांच मौके पर ही हो जाएगी। स्ट्रिप या केमिकल के जरिए होने वाले टेस्ट में रंग में बदलाव मिलावट का संकेत देगा। संदिग्ध नमूने ही आगे विस्तृत जांच के लिए भोपाल भेजे जाएंगे।

दूध में क्या-क्या मिल रहा है, अब मौके पर खुलेगा राज
नई जांच किट से दूध में यूरिया, न्यूट्रीलाइजर और सूक्रोज समेत 6 तरह की मिलावट की जांच की जा सकेगी। खासकर यूरिया जैसी मिलावट को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता लंबे समय से बनी रहती है।

वहीं न्यूट्रीलाइजर का इस्तेमाल दूध को ज्यादा समय तक खराब होने से बचाने और उसकी गुणवत्ता में कृत्रिम बदलाव के लिए किया जा सकता है। इसी तरह सूक्रोज की मिलावट की भी जांच होगी। विभाग के अनुसार इस तरह के पदार्थ दूध की वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

अब खाद्य सुरक्षा टीम जब दूध का सैंपल लेने पहुंचेगी तो सिर्फ बोतल में सैंपल भरकर भोपाल भेजने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। मौके पर ही जांच की पहली तस्वीर सामने आ जाएगी।

पहले सैंपल गया भोपाल, रिपोर्ट आई तो कई दिन बीत चुके

दूध की जांच में सबसे बड़ी परेशानी अब तक यही रही कि सैंपल लेने के बाद उसे जांच के लिए भोपाल भेजना पड़ता था। परिवहन, लैब जांच और रिपोर्ट आने की प्रक्रिया में समय लग जाता था।

इस दौरान संबंधित दूध विक्रेता पर तत्काल कोई निष्कर्ष निकालना संभव नहीं होता था। यही वजह है कि विभाग के लिए भी लगातार निगरानी चुनौती बनी रहती थी।
अब नई किट इस प्रक्रिया को काफी तेज कर सकती है। यदि मौके पर ही टेस्ट में मिलावट का संकेत मिलता है तो विभाग संदिग्ध नमूने को सुरक्षित तरीके से आगे की जांच के लिए भेज सकेगा।

109 सैंपलों में 12 अमानक, कार्रवाई भी दर्ज 

फूड इंस्पेक्टर विष्णु दत्त शर्मा के मुताबिक जांच किट शिवपुरी पहुंच चुकी है और इसका ट्रायल भी किया गया है। अब इससे 6 तरह की प्राथमिक जांच की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि अप्रैल से अब तक घी-मावा सहित खाद्य पदार्थों के 109 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 12 सैंपल अमानक पाए गए। इन नमूनों को भोपाल भेजकर जांच कराई गई और संबंधित मामलों में एडीएम कोर्ट में प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

अब दूध की मौके पर जांच की सुविधा मिलने से खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावट के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

रोज 2 लाख लीटर दूध की खपत, इसलिए मामला बड़ा
शिवपुरी जिले में प्रतिदिन करीब 2 लाख लीटर दूध की खपत होने का अनुमान बताया गया है। ऐसे में दूध की गुणवत्ता जांचने की नई व्यवस्था को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूध रोजाना इस्तेमाल होने वाला खाद्य पदार्थ है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में दूध में किसी भी प्रकार की मिलावट की जांच केवल कारोबारी कार्रवाई का मामला नहीं, बल्कि सीधे उपभोक्ताओं की चिंता से जुड़ा विषय है।

यही कारण है कि अब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी कि नई किट का इस्तेमाल सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित रूप से बाजार, डेयरी और दूध विक्रेताओं के यहां जांच की जाए।

मिलावटखोरों के लिए मौके पर ही खतरे की घंटी
नई व्यवस्था से सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि जांच टीम के सामने ही दूध की प्रारंभिक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। टेस्ट स्ट्रिप में रंग परिवर्तन या रासायनिक प्रतिक्रिया के आधार पर संदिग्धता सामने आने पर नमूने को आगे जांच के लिए भेजा जाएगा।

हालांकि मौके पर होने वाली जांच अंतिम प्रयोगशाला रिपोर्ट का विकल्प नहीं होगी। संदिग्ध नमूने की विस्तृत पुष्टि के लिए उन्हें भोपाल भेजा जाएगा। लेकिन प्राथमिक जांच से विभाग को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस सैंपल की विस्तृत जांच जरूरी है।
इससे बिना पर्याप्त कारण सैंपल बाहर भेजने की प्रक्रिया में भी कमी आ सकती है और विभाग अपने संसाधनों का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी तरीके से कर सकेगा।

अब असली परीक्षा विभाग की भी

नई जांच किट आने के बाद सवाल सिर्फ दूध की शुद्धता का नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता का भी है। किट मौजूद है, जांच की सुविधा मौजूद है और जिले में दूध की बड़ी खपत भी है। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि विभाग कितनी नियमितता से जांच अभियान चलाता है।

दूध में मिलावट की शिकायतें मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय यदि बाजार में लगातार औचक जांच होती है तो इसका असर दूध कारोबार से जुड़े लोगों पर भी पड़ेगा।

कुल मिलाकर अब दूध का खेल थोड़ा मुश्किल होने वाला है—बोतल या कैन में भरा दूध सीधे जांच की नजर में होगा। यूरिया, न्यूट्रीलाइजर, सूक्रोज, स्टार्च जैसी मिलावट के संकेत मौके पर ही मिलेंगे और संदिग्ध दूध की कहानी आगे भोपाल की लैब तक पहुंचेगी।

अब देखना यही है कि शिवपुरी में आई यह नई जांच किट दूध में छिपी मिलावट का राज खोलती है या फिर सरकारी जांच व्यवस्था की फाइलों में ही बंद होकर रह जाती है।
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