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| डॉ नरोत्तम मिश्रा |
शिवपुरी में आयोजित अखिल भारतीय ब्राह्मण सम्मान समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने समाज की एकजुटता और सम्मान के मुद्दे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज लगातार संयम बरत रहा है, लेकिन उसकी चुप्पी को कमजोरी समझना ठीक नहीं होगा। उन्होंने समाज से अपने सम्मान और स्वाभिमान के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में कुछ लोग ब्राह्मण समाज के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम के वंशज होने के नाते ब्राह्मण समाज को शास्त्र के साथ शस्त्र का भी ज्ञान रहा है। उनका कहना था कि विवादों से बचना चाहिए, लेकिन जब सम्मान और स्वाभिमान पर बात आए तो समाज को मजबूती से अपनी बात रखने के लिए तैयार रहना चाहिए।
समारोह के दौरान उन्होंने कविता की पंक्तियां सुनाते हुए कहा -
“युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
वह भी बड़े अभागे होंगे...
या तो रण को टाला होगा,
या तो रण से भागे होंगे।”
'ब्राह्मणों के खिलाफ टिप्पणियां क्यों?'
नरोत्तम मिश्रा ने अपने संबोधन में ब्राह्मणों के खिलाफ होने वाली कथित टिप्पणियों को लेकर एक उदाहरण भी दिया। उन्होंने सांप और जुगनू की कहानी सुनाते हुए कहा कि सांप जुगनू का लगातार पीछा करता था। जुगनू ने जब कारण पूछा तो सांप के पास कोई व्यक्तिगत वजह नहीं थी। मिश्रा ने इस प्रसंग के जरिए कहा कि कुछ लोगों को दूसरों की 'चमक' बर्दाश्त नहीं होती और इसी तरह की स्थिति उन्हें ब्राह्मण समाज के साथ नजर आती है।
इतिहास का हवाला देकर उठाया सवाल
पूर्व गृह मंत्री ने ब्राह्मणों पर शोषण के आरोपों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दौर में देश में अलग-अलग राजवंशों और शासकों का शासन रहा, जबकि ब्राह्मणों का शासन सत्ता के रूप में नहीं रहा। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि यदि ब्राह्मण शासक नहीं रहे तो उन पर हमेशा शोषण करने का आरोप किस आधार पर लगाया जाता है।
जातीय उपवर्गों में न बंटने की अपील
मिश्रा ने ब्राह्मण समाज से आपसी विभाजन से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज जैसे वर्गों में बंटने के बजाय एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक संगठित समाज ही अपनी बात प्रभावी तरीके से रख सकता है और सामाजिक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।
उन्होंने ब्राह्मण समाज की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वजों ने ज्ञान, मंत्र, ज्योतिष और पंचांग जैसी परंपराओं को विकसित किया। उन्होंने समाज से छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर एक साथ आगे बढ़ने और अपनी सामाजिक भूमिका को मजबूत करने की अपील की।

