पोते की अर्थी उठते ही दादा की भी मौत:घर में एक साथ उठीं दो अर्थियां

Nikk Pandit
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कभी-कभी जिंदगी में कुछ ऐसे पल आते हैं, जिनका दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल हो जाता है। 

खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के सिकरावदा गांव में रविवार को ऐसा ही एक हृदयविदारक घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। जिस पोते की अर्थी को दादा अंतिम विदाई देने के लिए कंधा देने और अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे, उसी दौरान रास्ते में दादा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। 65 वर्षीय छप्पनलाल रावत चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़े। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कुछ ही घंटों के अंतराल में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत से सिकरावदा गांव में मातम पसर गया।
परिजनों का कहना है कि पोते की मौत का सदमा छप्पनलाल रावत सह नहीं पाए और पोते की अर्थी के साथ जाते समय उनकी भी जान चली गई। हालांकि, चिकित्सकीय रूप से उनकी मौत का वास्तविक कारण क्या था, इसकी पुष्टि संबंधित जांच और चिकित्सकीय अभिलेखों से ही हो सकेगी।

दो दिन पहले तेज बहाव में बह गया था छोटू

जानकारी के अनुसार, सिकरावदा निवासी राजू रावत के 21 वर्षीय बेटे छोटू रावत दो दिन पहले हुई तेज बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव में बहकर लापता हो गए थे। अचानक हुए इस हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया था।

छोटू के लापता होने की सूचना के बाद परिजन के साथ ग्रामीण भी उसकी तलाश में जुट गए थे। बारिश और नदी-नालों में बढ़े पानी के बीच लगातार तलाश की जा रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि छोटू सुरक्षित मिल जाएगा, लेकिन रविवार सुबह गहलोनी के पास उसका शव मिलने की सूचना आई।

शव मिलने की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया। जिस परिवार में छोटू के सुरक्षित लौटने की उम्मीद की जा रही थी, वहां उसकी मौत की खबर ने सभी को तोड़कर रख दिया।

पोते की अर्थी लेकर निकला परिवार

रविवार शाम छोटू रावत के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए परिजन और ग्रामीण शव लेकर जा रहे थे। परिवार के बुजुर्ग छप्पनलाल रावत भी इस अंतिम यात्रा में शामिल थे।

परिजनों के मुताबिक, रास्ते में अचानक छप्पनलाल की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आया और वह अचानक जमीन पर गिर पड़े। आसपास मौजूद परिजन और ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें संभाला। उनकी हालत गंभीर देखकर उन्हें बिना देर किए अस्पताल ले जाया गया।
परिवार को उम्मीद थी कि उपचार के बाद उनकी हालत सुधर जाएगी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक अर्थी के साथ निकले, दूसरी अर्थी घर पहुंच गई
इस घटना ने परिवार को अंदर तक झकझोर दिया। जिस समय घर के लोग 21 वर्षीय छोटू को अंतिम विदाई देने के लिए निकले थे, उसी दौरान परिवार के बुजुर्ग छप्पनलाल भी दुनिया से विदा हो गए।

एक तरफ जवान पोते की मौत का गम और दूसरी तरफ बुजुर्ग दादा की अचानक मौत—परिवार के लिए यह दोहरा आघात बन गया। कुछ ही घंटों के अंतराल में परिवार ने अपने दो सदस्यों को खो दिया।

परिजनों का कहना है कि छोटू की मौत से छप्पनलाल गहरे सदमे में थे। पोते के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय उनकी तबीयत बिगड़ी और इसके बाद उनकी मौत हो गई।

बारिश ने छीना परिवार का सहारा, सदमे ने तोड़ा परिवार
छोटू की मौत पहले ही परिवार के लिए किसी बड़े हादसे से कम नहीं थी। बारिश के तेज बहाव में बहने के बाद उसका शव मिलने से परिवार पूरी तरह टूट गया था। इसी बीच दादा छप्पनलाल की अचानक मौत ने दुख को और गहरा कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, छप्पनलाल परिवार के बुजुर्ग सदस्य थे। पोते की मौत की खबर और उसके बाद अंतिम यात्रा में शामिल होना उनके लिए बेहद भावुक क्षण रहा होगा। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।

हालांकि, परिजन इसे पोते की मौत के सदमे से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन छप्पनलाल की मृत्यु का चिकित्सकीय कारण स्पष्ट रूप से सामने आना अभी बाकी है।

गांव में पसरा मातम

सिकरावदा गांव में घटना के बाद से शोक का माहौल है। एक ही परिवार में लगातार दो मौतों की खबर से ग्रामीण भी स्तब्ध हैं। रविवार को जहां छोटू के शव की अंतिम यात्रा निकली, वहीं सोमवार को छप्पनलाल का भी अंतिम संस्कार किया गया।

परिजनों के लिए यह समय बेहद कठिन है। एक तरफ जवान बेटे और पोते को खोने का दुख है, तो दूसरी तरफ परिवार के बुजुर्ग का भी अचानक चले जाना पूरे परिवार को गहरे सदमे में छोड़ गया है।

बारिश के मौसम में फिर सामने आया खतरा

छोटू रावत की मौत ने बारिश के दौरान नदी-नालों में बढ़ने वाले तेज बहाव के खतरे को भी सामने ला दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के बाद कई मौसमी नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। ऐसे में तेज बहाव में फंसने से जान का खतरा बना रहता है।

सिकरावदा की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जलभराव और तेज बहाव के खतरे की गंभीर तस्वीर भी सामने लाती है।

एक परिवार ने पहले अपने जवान बेटे को खोया और उसके अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच बुजुर्ग दादा भी दुनिया छोड़ गए। सिकरावदा में कुछ ही घंटों के अंतराल में उठीं दो अर्थियों ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया।

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