नया अमोला शराब दुकान को लेकर महिलाओं का हंगामा:पेटियां जलाने के बाद भी दुकान खुली तो फिर सड़कों पर उतरीं महिलाएं:थाना प्रभारी और आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी जिले के नया अमोला में शराब दुकान को लेकर बुधवार को महिलाओं और प्रशासन के बीच दिनभर विरोध, नाराजगी और बातचीत का दौर चलता रहा। महिलाओं का आरोप है कि आबादी वाले इलाके में शराब दुकान संचालित होने से गांव का माहौल प्रभावित हो रहा है। मंगलवार को महिलाओं ने दुकान में घुसकर शराब की पेटियां बाहर निकालीं और उनमें आग लगा दी थी। इसके बावजूद बुधवार को जब दुकान दोबारा खुलने की जानकारी सामने आई तो महिलाओं का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा।

महिलाएं शराब दुकान को आबादी से हटाने की मांग को लेकर बस स्टैंड के पास काली माता मंदिर पर एकत्रित हो गईं। इसके बाद प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। महिलाओं ने अधिकारियों के सामने अपनी मांग रखी और स्पष्ट किया कि दुकान को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने तक उनका विरोध जारी रहेगा।

मामले में अब अमोला थाना पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। महिलाओं का कहना है कि जब मंगलवार को दुकान में घुसकर शराब की पेटियां बाहर निकालकर जलाई गईं, तब अगले ही दिन दुकान खुलने की स्थिति कैसे बनी?
 क्या मंगलवार की घटना के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग ने दुकान की सुरक्षा, संचालन और विवाद की स्थिति को लेकर कोई ठोस कदम उठाया था? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभागों से मांगा जा रहा है।

मंगलवार को पेटियां जलाने के बाद बुधवार को फिर खुली दुकान

मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई थी, जब महिलाओं ने शराब दुकान के खिलाफ विरोध करते हुए दुकान में प्रवेश किया और वहां रखी शराब की पेटियां बाहर निकालकर उनमें आग लगा दी।

महिलाओं का कहना था कि शराब दुकान को आबादी वाले क्षेत्र से हटाया जाए। उनका आरोप है कि दुकान के कारण आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है और नशे की उपलब्धता से सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है।

मंगलवार की घटना के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन और आबकारी विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कोई प्रभावी कदम उठाएगा। लेकिन बुधवार को दुकान खुलने की जानकारी मिलते ही महिलाओं ने फिर मोर्चा संभाल लिया।

थाना प्रभारी की मौजूदगी में भी नहीं थमा महिलाओं का विरोध

बुधवार को आबकारी विभाग के अधिकारी पुलिस और शराब दुकान संचालक के साथ नया अमोला पहुंचे। दुकान खुलने की जानकारी मिलते ही महिलाएं बस स्टैंड के पास काली माता मंदिर पर जमा हो गईं।

इसके बाद अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने महिलाओं से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।

यहां सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि मंगलवार को दुकान में हुई घटना के बाद बुधवार को स्थिति दोबारा तनावपूर्ण होने से पहले प्रशासन और पुलिस ने विवाद को रोकने के लिए क्या तैयारी की थी? महिलाओं का विरोध लगातार दूसरे दिन सामने आया। ऐसे में स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

हालांकि, थाना प्रभारी या किसी अधिकारी पर लापरवाही का आरोप जांच और संबंधित पक्ष के जवाब के बाद ही प्रमाणित माना जा सकता है।

महिलाओं को दुकान तक ले जाना पड़ा करीब एक घंटे की बातचीत के बाद महिलाएं अधिकारियों को ज्ञापन देने के लिए तैयार हुईं। इसके बाद वे शराब दुकान तक पहुंचीं और दुकान बंद करने तथा उसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग रखी।

महिलाओं ने कहा कि शराब दुकान ऐसी जगह नहीं होनी चाहिए जहां आसपास बड़ी संख्या में लोग रहते हों और सार्वजनिक आवागमन होता हो। उन्होंने गांव में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी रखी।

हाईवे पर चक्काजाम की चेतावनी

जब महिलाओं की मांग तत्काल पूरी होती नजर नहीं आई तो वे बस स्टैंड की ओर बढ़ने लगीं। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि शराब दुकान तत्काल बंद या शिफ्ट नहीं की गई तो वे हाईवे पर चक्काजाम करेंगी।

इसके बाद अमोला चौकी, हाईवे चौकी और सुरवाया थाना क्षेत्र से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया।

यह स्थिति भी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल बन गई कि एक शराब दुकान को लेकर लगातार दो दिन से विरोध की स्थिति क्यों बनी रही और पहले ही दिन इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा सका।

आबकारी विभाग पर भी उठ रहे सवाल

मामले में आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर विभाग को यह जानकारी थी कि दुकान को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है, इसके बावजूद विवाद को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

महिलाओं ने पहले ही दुकान हटाने की मांग उठाई थी। मंगलवार को विवाद इतना बढ़ा कि शराब की पेटियां तक जला दी गईं। इसके बाद भी बुधवार को दुकान खुलने से स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई।

अब सवाल यह है कि आबकारी विभाग ने मंगलवार की घटना के बाद दुकान संचालक और स्थानीय प्रशासन के साथ क्या समन्वय किया? क्या दुकान की स्थिति और स्थान को लेकर शिकायतों की समीक्षा की गई? क्या महिलाओं की शिकायतों का कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया? इन सवालों पर आबकारी विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

5 दिन में कार्रवाई के आश्वासन के बाद मानी महिलाएं
महिलाओं ने शराब दुकान को पांच दिन के भीतर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि दुकान को आबादी वाले क्षेत्र और सार्वजनिक आने-जाने वाले स्थान से हटाया जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं को पांच दिन में कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद महिलाओं ने फिलहाल चक्काजाम नहीं करने और अपना विरोध समाप्त करने पर सहमति जताई। इसके बाद स्थिति शांत हुई और पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली।

अब पांच दिन बाद क्या होगा?

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद महिलाओं ने विरोध समाप्त कर दिया है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब असली परीक्षा पांच दिन की समयसीमा की है।

महिलाओं ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय में शराब दुकान को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा आंदोलन कर सकती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस, आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को शराब की पेटियां जलाने की घटना के बाद बुधवार को फिर दुकान खुलना और महिलाओं का दोबारा सड़क पर उतरना बताता है कि विवाद का स्थायी समाधान अभी बाकी है।

अब देखना होगा कि प्रशासन महिलाओं के पांच दिन के अल्टीमेटम पर क्या कार्रवाई करता है और आबकारी विभाग शराब दुकान के स्थान को लेकर उठ रही आपत्तियों पर क्या जवाब देता है।
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