सिर्फ 37 मकान पूरे, बाकी अधूरे छोड़ दिए
जांच में सामने आया है कि गांव में योजना के तहत कुल 125 मकान मंजूर हुए थे, लेकिन इनमें से केवल 37 ही पूरे किए गए। बाकी मकान या तो अधूरे हैं या फिर शुरुआत ही नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 20 अधूरे मकानों को पोर्टल पर पूरा दिखाकर राशि निकाल ली गई।
सचिव और बेटे ने खुद लिया ठेका, मजदूरी की राशि भी हड़पी
आदिवासी हितग्राहियों ने बयान में बताया कि सचिव और उसके बेटे ने खुद ही निर्माण का काम अपने हाथ में ले लिया था। उन्होंने मकान बनाने की पूरी राशि ले ली, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया। इतना ही नहीं, मजदूरी की जो राशि हितग्राहियों को मिलनी थी, वह भी गलत तरीके से दूसरे जॉब कार्डधारियों के खातों में भेज दी गई।
11 नए मकानों में से 3 की राशि दबा ली, 8 अपात्रों को दिया लाभ
साल 2023-24 में योजना के तहत 11 नए मकान स्वीकृत हुए थे। इनमें से 3 हितग्राहियों की 1.50 लाख रुपए की राशि सचिव ने खुद रख ली। न तो पैसा बैंक में जमा किया गया और न ही मकान बनाने का काम शुरू हुआ। इसके अलावा, 8 ऐसे लोगों को भी योजना का लाभ दे दिया गया जो इसके पात्र नहीं थे।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद बामौरकलां पुलिस ने सचिव जीवन सिंह यादव और उसके बेटे रविप्रताप यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) और 316(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।