क्षमाभाव जीवन में उतारने से आधी समस्या हो जाती है खत्म
कार्यक्रम में कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी ने कहा कि दूसरों से क्षमा मांगना आसान है, लेकिन हृदय से क्षमा करना कठिन होता है। अगर हम क्षमा भाव को जीवन में उतार लें तो कई परेशानियां खुद ही खत्म हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि साल में कम से कम एक बार क्षमा मांगना जरूरी है, इससे हम अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं और संबंधों में मधुरता आती है।
जियो और जीने दो का सिद्धांत जरुरी
जिला पंचायत सीईओ शोभित जैन ने भगवान महावीर के संदेश "जियो और जीने दो" पर जोर देते हुए कहा कि जब यह विचार समाज में पहुंचेगा तभी अहिंसा और क्षमा का सच्चा संदेश फैल सकेगा। पोहरी विधायक कैलाश कुशवाहा ने कहा कि राजनीति में कई बार कटुता आ जाती है, लेकिन क्षमावाणी पर्व आपसी द्वेष को मिटाने का काम करता है। उन्होंने मंच से सभी से क्षमा भी मांगी।
धर्मसभा में खनियाधाना से आए विद्वान आकाश जी ने दोहे के माध्यम से क्षमा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि क्षमा का भाव ऐसा होना चाहिए कि जब दो सज्जन मिलें तो उनके चेहरे पर मुस्कान और दिल में उल्लास झलकना चाहिए।
महोत्सव में कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं
महोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। महिलाओं ने क्षमा धर्म और हिंदी दिवस पर विशेष प्रस्तुतियां दीं। पाठशाला के बच्चों ने नृत्य और नाटक प्रस्तुत किए, जिनमें समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य भी किया गया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर प्रस्तुतियां विशेष रूप से सराही गईं।
इस मौके पर राजेश जैन राजू ने स्वागत भाषण दिया और संयोजक अमित जैन टिंकल ने आभार व्यक्त किया।