पार्षदों ने एसपी को दिया ज्ञापन
मंगलवार शाम शहर के कई पार्षदों ने इस मुद्दे को लेकर एसपी और विवेचना अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि जब भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलों पर भुगतान आदेश और माप पुस्तिका (MB बुक) का सत्यापन CMO और अध्यक्ष के निर्देश पर हुआ है, तो उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पहले से दर्ज है भ्रष्टाचार का मामला
इस मामले में पहले ही थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 504/2025 दर्ज है। इसमें तत्कालीन सहायक यंत्री सत्तेश निगम, उपयंत्री जीतेंद्र परिहार और ठेकेदार अर्पित शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है। यह एफआईआर शिवपुरी कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी।
न्यायालय ने की थी टिप्पणी
विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) शिवपुरी और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खंडपीठ ने भी आरोपी ठेकेदार अर्पित शर्मा की जमानत अर्जी खारिज करते हुए CMO और अध्यक्ष की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की है। 23 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश में न्यायालय ने कहा कि कार्यपालन यंत्री की अनुशंसा के बाद अंतिम भुगतान की स्वीकृति CMO और अध्यक्ष द्वारा दी गई थी।
पहले भी हो चुका विवाद
गौरतलब है कि, ये वही पार्षद हैं जिन्होंने कुछ महीने पहले अध्यक्ष गायत्री शर्मा को हटाने के लिए बगीचा सरकार हनुमान मंदिर पर शपथ ली थी। वे अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला चुके हैं, लेकिन संख्या बल के अभाव में प्रस्ताव पास नहीं हो सका था। बाद में नाराज पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफे भी दिए थे, जो बाद में नामंजूर कर दिए गए।