दिग्विजय सिंह का कहना था कि सारी लड़ाई पैसे की है।
आरएसएस भी अब ईमानदार नहीं रही है। आरएसएस कार्यकर्ता बेईमान हो चुके हैं। एक जमाने में आरएसएस के लोग चना खाकर प्रचार करते थे और सायकल पर चलते थे, परंतु आजकल वे ही भ्रष्टाचार का एक अंग बन चुके हैं, इसलिए ये भाजपा और संघ मिलकर प्रदेश को लूट रहे हैं। यही कारण है कि यहां की जितनी नगर पालिकाओं में लड़ाई हो रही है, वह शुद्ध रूप से पैसे की लड़ाई है, भ्रष्टाचार की लड़ाई है। यही कारण है कि पहले सरकार न कहा दो-तिहाई बहुमत आ जाएगा तो अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा। अब उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव खाली कुर्सी, भरी कुर्सी के हिसाब से होगा। यह पूरी तरह से भ्रष्टाचार को पनपाने और संरक्षण देने के लिए किया है, क्योंकि इनका माडल आफ गवर्नेंस है कि अधिकारी, कर्मचारी और भाजपा नेता मिलकर काम करेंगे, मिलकर ठेके लेंगे। उनका कहना था कि अधिकारी कर्मचारी और नेता मिलकर काम करेंगे तो यह पार्टनरशिप हो गई। जब यह पार्टनरशिप हो गई तो संबंध अधिकारी, कर्मचारी और नेता का नहीं बल्कि पार्टनर का हो गया, जबकि नेता की जबाबदेही होती है कि काम ईमानदारी से हो, गरीब लोगों का काम हो, भ्रष्टाचार कम हो। आज हालात यह हो गए हैं कि अगर एक लाख का प्रोजेक्ट है तो उसका 30 से 40 प्रतिशत तो रिश्वत में ही चला जा रहा है।
सांसद और विधायक कमीशन पर देते से निधि दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि आज भाजपा के अधिकांश एमएलए और एमपी, विधायक निधि व सांसद निधि कमीशन पर देते हैं। यहां तक कि जो पैसा डायरेक्टली केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पास से आता हैं, वहा पंचायतों को 15-20 प्रतिशत कमीश्न देना पड़ता है। इस कमीशन में भाजपा नेताओं का हिस्सा है। दिग्विजय सिंह के अनुसार आज हालत यही हैं, तुम भी खाओ, हमें भी खिलाओ, ताकि भ्रष्टाचार की पार्टनरशिप मजबूती के साथ चलती रहे।