दोपहर बाद शहर के प्रमुख मार्गों से नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। अमृतसर से आए पंजाब के शहीद गुरुसिंह जत्था और बेजानगढ़ बैंड का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। जत्थे ने परंपरागत गतका, तलवारबाजी और शौर्य करतब दिखाकर वाहवाही लूटी। शहरवासियों ने "वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह" के जयकारों से स्वागत किया।
अमृतसर से आए पंजाब के शहीद गुरुसिंह जत्था और बेजानगढ़ बैंड का प्रदर्शन।
स्वच्छता का संदेश- स्वयंसेवकों ने उठाया कचरा
इस बार नगर कीर्तन में स्वच्छता का विशेष संदेश भी दिया गया। स्वयंसेवकों के जत्थे रैली के पीछे चलकर रास्ते में पड़ा कचरा उठाते नजर आए। महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। लोगों ने कहा कि अन्य सामाजिक आयोजनों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
रात को आतिशबाजी और लंगर
शाम होते ही गुरुद्वारा परिसर को रंगीन रोशनी और आतिशबाजी से सजाया गया। देर रात तक आसमान में चमकती फुलझड़ियों ने उत्सव को खास बना दिया। इसके बाद गुरु के अटूट लंगर में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में गुरुद्वारा प्रबंधक समिति एवं जिले की संगत द्वारा उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गईं। देर रात तक कार्यक्रम चलता रहा और शिवपुरी गुरु नानक नाम की भक्ति में डूबा रहा।