धर्मांतरण कराने वाले चार शासकीय कर्मचारी सहित पांच आरोपी गिरफ्तार, 50 लोगों के धर्म परिवर्तन की पुष्टि, फंडिंग नेटवर्क की जांच शुरू

Shivpuri First
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शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति के लोगों का प्रलोभन व दुर्व्यपदेशन के जरिए सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने के बड़े मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार शासकीय कर्मचारियों सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


बदरवास थाना में थाना प्रभारी रोहित दुबे ने आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 3, 4 तथा मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3, 5 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।


एसडीओपी संजय मिश्रा ने बताया कि दिनांक 22 दिसंबर को ग्राम घूघला निवासी सरपंच हमीर सिंह पुत्र रामसिंह भील (32) ने थाना बदरवास में शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पादरी अम्जी भील, वीरेन्द्र कुमार तिर्की (शिक्षक), अनीता भगत (शिक्षिका), राजपति बाई तिर्की (शिक्षिका) एवं सुगनचंद उर्फ सुगनशाह पैकरा (पटवारी) द्वारा ग्राम घूघला व आसपास के अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय के लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच, दबाव और दुर्व्यपदेशन के जरिए सामूहिक धर्मांतरण कराया जा रहा है।


शिकायत के अनुसार बहादुर भील व सोमला भील के घर में आयोजित बैठकों के दौरान आवेदक हमीर सिंह भील सहित अन्य ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र रचा गया। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।


प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अमनसिंह राठौड़ ने तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले एवं संजय मिश्रा के निर्देशन में थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित दुबे ने पुलिस टीम गठित कर उसी दिन सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।


एसडीओपी संजय मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी संगठित तरीके से लंबे समय से धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्त थे, इसलिए बिना देरी किए कड़ी कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी रोहित दुबे के नेतृत्व में यह पूरी कार्रवाई संपन्न हुई।


गिरफ्तार आरोपियों में अम्जी भील पुत्र मानसिंह भील (50 वर्ष), निवासी घूघला

वीरेन्द्र कुमार तिर्की (54 वर्ष), शिक्षक, ग्राम पिपरोदा में करीब 25 वर्षों से पदस्थ

सुगनचंद उर्फ सुगनशाह पैकरा (52 वर्ष), पटवारी, पूर्व में कोलारस पदस्थ, विगत 2 वर्षों से ग्राम गुढालडांग (बदरवास) में पदस्थ

राजपति बाई तिर्की (51 वर्ष), ग्राम अगरा में करीब 24 वर्षों से शिक्षिका

अनीता भगत (52 वर्ष), ग्राम गुढालडांग में करीब 27 वर्षों से शिक्षिका


4–5 साल से चल रहा था ‘धर्मांतरण मिशन’ - 


विवेचना में सामने आया कि आरोपी पिछले 4 से 5 वर्षों से इस कार्य में सक्रिय थे। गरीब आदिवासी परिवारों को बेहतर भविष्य, बच्चों की अच्छी शिक्षा, बच्चियों की शादी, नौकरी लगवाने और धर्म परिवर्तन करने पर 25-25 हजार रुपए देने का वादा किया जाता था। पुलिस जांच में अब तक 50 लोगों के धर्म परिवर्तन की पुष्टि हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।


पुलिस ने आरोपियों के पास से धर्मांतरण से संबंधित सामग्री भी जप्त की है। साथ ही अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।


फंडिंग नेटवर्क की गहन जांच

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर जिलों से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि धर्मांतरण के लिए फंडिंग कहां से आ रही थी, किन माध्यमों से धन का उपयोग हो रहा था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।


वन भूमि पर अवैध चर्च निर्माण भी जुड़ा - 


उल्लेखनीय है कि इससे दो दिन पहले बदरवास क्षेत्र के गुढालडांग में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे थे, जहां ईसाई धर्म की सभा चल रही थी। मौके पर वन भूमि पर चर्च के लिए अवैध निर्माण भी पाया गया। झोपड़ी के भीतर बाइबिल सहित धार्मिक सामग्री मिली, जिसके बाद वन विभाग ने पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी से निर्माण ध्वस्त कर दिया था।


एसडीओपी कोलारस संजय मिश्रा ने बताया कि सभी आरोपी छत्तीसगढ़ के जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर जिलों के रहने वाले हैं। आरोपियों ने आदिवासी परिवारों को बेहतर भविष्य, शिक्षा और धर्म परिवर्तन करने पर 25 हजार रुपए देने का वादा किया था। पुलिस अब इनसे जुड़े अन्य लोगों की भी पड़ताल करेगी, साथ ही धर्मांतरण की फंडिंग का भी पता लगाया जा रहा है। अब तक 50 लोगों के धर्म परिवर्तन की पुष्टि हो चुकी है।

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