वन विभाग पर मजदूरी भुगतान में धोखाधड़ी का आरोप, 70 मजदूर धरने पर:शहडोल के मजदूरों ने शिवपुरी कलेक्ट्रेट में डाला डेरा

Nikk Pandit
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शिवपुरी वन विभाग में मजदूरी के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मजदूरी न मिलने से नाराज शहडोल जिले के करीब 70 मजदूरों ने मंगलवार को शिवपुरी कलेक्ट्रेट परिसर में डेरा डाल दिया। मजदूरों का कहना है कि जब तक उन्हें पूरी मजदूरी नहीं दी जाती, वे कलेक्ट्रेट से नहीं हटेंगे।

ये सभी मजदूर मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के निवासी हैं और शिवपुरी वन विभाग की विभिन्न तहसीलों में मजदूरी करने आए थे। उनकी मुख्य ठेकेदार ममता आदिवासी हैं। मजदूरों का आरोप है कि वे पिछले तीन माह से लगातार कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।

निर्माण के बाद अधूरा भुगतान

मजदूरों ने अपने आवेदन में बताया कि उन्होंने ग्राम गणेशखेड़ा, तहसील कोलारस में 2232 मीटर दीवार का निर्माण किया है। इसके अतिरिक्त, लुकवासा रांची में 820 मीटर पत्थर की दीवार और बदरवाद क्षेत्र में 1.5×1.5 फीट के 30 हजार गड्ढे खोदने का कार्य भी किया है।

मजदूरों के अनुसार, उनकी कुल मजदूरी राशि 13 लाख 34 हजार 560 रुपए बनती है। इसमें से अब तक उन्हें केवल 2 लाख 55 हजार रुपए का ही भुगतान किया गया है। शेष राशि न मिलने के कारण मजदूर अपने घर-परिवार और बच्चों के लिए पैसे नहीं भेज पा रहे हैं।

बोले- गंदा पानी पीने तक को मजबूर हुए

ठेकेदार ममता आदिवासी ने बताया कि डिप्टी रेंजर तुलाराम दिवाकर से 1.5×1.5 फीट के गड्ढे के लिए 16 रुपए और 4 फीट चौड़ी व 5 फीट ऊंची पत्थर की दीवार के लिए 280 रुपए प्रति मीटर की दर तय हुई थी। हालांकि, अब वन विभाग 7 रुपए प्रति गड्डा और 100 रुपए प्रति मीटर देने की बात कह रहा है।

मजदूर सपना आदिवासी ने यह भी बताया कि जंगल में काम के दौरान विभाग द्वारा पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी, जिसके कारण मजदूरों को गड्डों में भरा गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मजदूर राजेश की पत्नी की मौत हो जाने के बाद भी उसके परिवार को मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया और परिवार को बिना पैसे लिए वापस लौटना पड़ा।

पीड़ित मजदूरों ने पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर शिवपुरी से दर्ज कराई है और उचित कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस मामले में जब डिप्टी रेंजर तुलाराम दिवाकर, रेंजर और डीएफओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया।
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