कमलागंज घोसीपुरा निवासी हेमंत जाटव एक पैर से दिव्यांग हैं और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी सुमित्रा जाटव दोनों आंखों से देख नहीं पातीं। हेमंत ने बताया कि दिव्यांगता के कारण उन्हें पूरी मजदूरी नहीं मिल पाती। उनकी दैनिक आय महज 100 से 200 रुपए है। तीन साल पहले जन्मी बेटी भी दृष्टिहीन है, जिसका इलाज दिल्ली में चल रहा है, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
3 दिन पहले हुआ बेटा, उसकी भी आंखों में रोशनी नहीं
तीन दिन पहले सुमित्रा को प्रसव के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। चिकित्सकों ने जांच के बाद पुष्टि की कि नवजात शिशु भी जन्म से ही दृष्टिहीन है। परिवार के चारों सदस्यों के दिव्यांग होने से जीवनयापन की चुनौती और बढ़ गई है। हेमंत का कहना है कि उन्हें अब तक सरकार से कोई भी आर्थिक या चिकित्सीय सहायता प्राप्त नहीं हुई है।
डॉक्टर बोले- यह जेनेटिक बीमारी, RBSK के तहत होगा इलाज
जिला अस्पताल के डॉ. देवेंद्र कौशिक ने बताया कि बच्चे की आंखों में सफेद झिल्ली पाई गई है, जिसे 'क्लाउडी कॉर्निया' कहते हैं। यह एक जन्मजात और आनुवंशिक बीमारी है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जा सकती है। मां को भी यह समस्या है, इसलिए बच्चों में इसके होने की संभावना अधिक थी। डॉ. कौशिक ने बताया कि नवजात को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार के लिए भेजा गया है। लगभग एक माह के भीतर इलाज शुरू होने की उम्मीद है। ऑपरेशन के बाद बच्चे को कुछ राहत मिल सकती है।