अभिभाषक संघ करैरा ने एसडीएम को सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है। इसमें मृतक अधिवक्ता के परिवार को आर्थिक सहायता, न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग प्रमुख है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो हड़ताल 20 फरवरी तक जारी रहेगी।
मंगलवार को जिला जज करैरा न्यायालय पहुंचे और अधिवक्ताओं से चर्चा की। हालांकि, अधिवक्ताओं ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की अपनी मांग पर जोर देते हुए 20 फरवरी तक काम पर न लौटने का निर्णय दोहराया।
सुविधाओं के अभाव पर भी सवाल उठाए
अधिवक्ताओं ने नवीन न्यायालय भवन में सुविधाओं के अभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने न्यायालय को स्थानांतरित करने के लिए जिस नई भूमि पर भवन बनाया गया, उसका शुरू से ही विरोध किया गया था। इसके बावजूद वहां भवन निर्माण कर न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया गया।
अधिवक्ताओं के अनुसार, 24 फरवरी 2024 को नए न्यायालय भवन का उद्घाटन हुआ और 4 मार्च 2024 से कामकाज शुरू हो गया। उन्हें नेटवर्क व्यवस्था, बैंक, बीमा, डाकघर, स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस चौकी जैसी मूलभूत सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, लेकिन ये सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। परिसर में न तो समुचित सुरक्षा व्यवस्था है और न ही पेयजल व सफाई की पर्याप्त व्यवस्था।
बोले- सुरक्षा के अभाव में हत्या हुई
अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि न्यायालय एक सुनसान और डकैती प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जिससे असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था के अभाव के कारण ही 14 फरवरी को अधिवक्ता संजय सक्सेना की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कई अधिवक्ता वकालत का पेशा छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की कि केंद्र से लागू एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल करैरा न्यायालय में हड़ताल जारी है।