सागर शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के ग्राम ख्यावदा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक पीड़ित परिवार ने देहात थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रार्थी बहादुर परिहार द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उसकी पुत्री के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की।
पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में प्रार्थी बहादुर परिहार ने बताया कि 27 मार्च 2026 की रात करीब 3 बजे आरोपी चरत परिहार नशे की हालत में घर में घुसा और उसकी पुत्री को जबरन खाना बनाने के लिए उठाया। खाना देने के बाद आरोपी ने गाली-गलौज शुरू कर दी और विरोध करने पर पति, सास और ससुर ने मिलकर महिला पर जानलेवा हमला कर दिया।
पीड़िता को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके सिर में 18 टांके लगे, एक पैर पूरी तरह घायल हो गया और शरीर पर कई गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज हुआ।
लेकिन इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब प्रार्थी ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी जियाजी को पुलिस ने पकड़ने के बाद छोड़ दिया। इतना ही नहीं, थाना देहात में शिकायत के बावजूद ना कोई सख्त कार्रवाई हुई, ना ही आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।
पीड़ित परिवार का साफ कहना है कि पुलिस ने आरोपियों से “सांठगांठ” कर मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे न्याय की उम्मीद और भी कमजोर हो गई है।
❗ अब उठ रहे हैं सीधे और तीखे सवाल:
क्या देहात थाना पुलिस आरोपियों को बचाने में लगी है?
आरोपी को पकड़ने के बाद छोड़ने के पीछे किसका दबाव है?
क्या आम जनता को न्याय दिलाने में पुलिस नाकाम हो रही है?
आखिर कब तक पीड़ित परिवार यूं ही भटकता रहेगा?
🔥 आखिरी वार (इम्पैक्ट लाइन):
👉 अगर यही पुलिस की कार्यशैली रही, तो कानून का डर खत्म और अपराधियों का हौसला बुलंद होना तय है… अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर क्या एक्शन लेते हैं!
थाना प्रभारी देहात को फोन कॉल करने पर फोन नहीं उठा,,,,,,