सागर शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद की कोटा पंचायत के छिपौल गांव से हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां करीब 1500 ग्रामीण आज भी साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। सवाल ये है कि आखिर इतने बड़े गांव की प्यास बुझाने के लिए अब तक कोई ठोस इंतजाम क्यों नहीं हुआ?
ग्रामीणों के अनुसार, गांव का एकमात्र हैंडपंप पिछले 3 साल से खराब पड़ा है, लेकिन कई बार शिकायत के बावजूद पीएचई विभाग और प्रशासन ने सिर्फ आश्वासन ही दिया। नतीजा—पूरा गांव अब नदी के भरोसे है, वही पानी पीने, नहाने और रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन क्या यह पानी पीने लायक है?
☀️ गर्मी में हालात और भयावह
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, नदी का जलस्तर घट रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि जल्द ही नदी सूख जाएगी और तब उन्हें गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ेगा। सोचिए, 21वीं सदी में लोग गड्ढों से पानी निकालकर पीने को मजबूर हैं!
👩 ग्रामीणों का दर्द
गौरी बताती हैं कि तीन साल से यही हाल है, गंदा पानी पीने से लोग बीमार पड़ते हैं लेकिन कोई विकल्प नहीं।
घीसू कहती हैं कि हैंडपंप सालों से बंद है, पूरे गांव की निर्भरता नदी पर है।
मोहन सिंह आदिवासी के मुताबिक, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा बीमार हो रहे हैं, इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है।
🗳️ नेताओं पर फूटा गुस्सा
ग्रामीण सुआलाल का आरोप है—“चुनाव के समय नेता आते हैं, वादे करते हैं, फिर गायब हो जाते हैं।” विधायक-सांसद तक शिकायत पहुंची, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं। आखिर कब तक जनता सिर्फ वादों पर जिएगी? ❗
🏢 पीएचई विभाग का जवाब
पीएचई के ईई शुभम अग्रवाल का कहना है कि मामला संज्ञान में है।
एक हैंडपंप में मोटर फंसी हुई है
दूसरा पुराना होकर खराब हो चुका है
उन्होंने दावा किया है कि एक सप्ताह में समाधान निकाल लिया जाएगा।
❓ बड़ा सवाल
क्या इस बार वाकई समस्या हल होगी या फिर ये भी एक और “आश्वासन” बनकर रह जाएगा?