नारी शक्ति वंदन पर शिवपुरी में सियासी घमासान: भाजपा का विपक्ष पर तीखा हमला, 33% आरक्षण रोकने का आरोप

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी में गुरुवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया, जब भारतीय जनता पार्टी ने होटल उदय विलास में जोरदार प्रेस वार्ता कर विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोला। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष नीलिमा शिंदे ने तीखे शब्दों में कहा कि लोकसभा में हालिया घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है

कि विपक्ष देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों और उनके भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन को रोककर अपनी “महिला विरोधी मानसिकता” उजागर कर दी है। सवाल उठता है—क्या महिलाओं का सशक्तिकरण अब भी राजनीति का मोहरा बना हुआ है? 

प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव ने भी विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों के विरोध से भरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने समय-समय पर महिलाओं के हितों के खिलाफ रुख अपनाया है

जो महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं और सरकार इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस सियासी बयानबाजी के बाद भाजपा महिला मोर्चा ने अपने शक्ति प्रदर्शन का भी संदेश दिया। प्रेस वार्ता के बाद एक विशाल महिला जन आक्रोश सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए नीलिमा शिंदे ने एक बार फिर विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के लिए महिला सशक्तिकरण सिर्फ चुनावी मुद्दा है, जबकि भाजपा इसे जमीन पर उतारने का काम कर रही है।

कार्यक्रम के बाद महिला मोर्चा ने जन आक्रोश रैली भी निकाली, जो होटल उदय विलास से शुरू होकर गुना बायपास तक पहुंची। रैली में महिलाओं की भारी भागीदारी देखने को मिली, जिससे भाजपा ने अपने संगठन की ताकत का प्रदर्शन भी किया।

इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव, नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा, हेमलता रावत, डॉ. रश्मि गुप्ता, दीपा बंसल और महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सीमा शिवहरे सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नारी शक्ति वंदन अधिनियम वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बनेगा, या फिर यह मुद्दा भी सियासी आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर रह जाएगा?

क्या विपक्ष सच में आरक्षण के खिलाफ है या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है? और सबसे अहम—क्या महिलाओं को उनका हक समय पर मिल पाएगा या यह मुद्दा चुनावी मंचों तक ही सीमित रह जाएगा? 

📢 शिवपुरी में उठी ये सियासी चिंगारी अब प्रदेश की राजनीति को कितना गर्माएगी, यह आने वाला समय बताएगा…
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